भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभारत में यूरोपियन जातियों का प्रवेश २१
औरंगज़ेब ने उदारता में आकर और उन पर विश्वास करके उन्हें बख्श
दिया और सूरत आदि की कोठियाँ उन्हें वापस दे दीं। सन् १६९०
में औरंगज़ेब ने उन्हें कई नई कोठियाँ क़ायम करने और वहाँ पर
अपनी हिफ़ाज़त के लिये क़िलेबंदी करने तक की इजाज़त दे दी।
औरंगज़ेब ही के समय में उसके पौत्र अज़ीमशाह ने बंगाल के
सूबेदार की हैसियत से हुगली नदी के ऊपर छूतानटी, कलकत्ता
और गोबिन्दपुर नाम के तीन गाँव बतौर जागीर कम्पनी को दे
दिये। उसी समय फ़ोर्ट विलियम क़िले की बुनियाद डाली गई।
जिस समय पहले पहल यह क़िलेबंदी की जा रही थी, औरंगज़ेब
के पास इसकी ख़बर पहुँची। औरंगज़ेब को सलाह दी गई कि इस
क़िलेबंदी को रोका जावे, किन्तु दिल्ली सम्राट की नज़रों में अंगरेज़
उस समय एक इतनी तुच्छ चीज़ थे कि उनकी इन कार्रवाइयों में
दख़ल देना उसे ग़ैर ज़रूरी मालूम हुआ। इन ग़रीब परदेसियों के
साथ वह हर तरह दया और उदारता का ही व्यवहार करना
चाहता था। औरंगज़ेब ने उत्तर दिया :—
"मैं इन चीज़ों में क्यों दखल दूं ? बहुत मुमकिन है कि आसपास की
मेरी देशी रिआया उनसे ईर्षा रखती हो और झगड़े करती हो, फिरंगी लोग
अपनी शक्ति भर अपनी हिफ़ाज़त का इन्तज़ाम क्यों न करें ? ये ग़रीब लोग
इतनी दूर से आये हैं और अपनी रोज़ी के लिये इतनी मेहनत करते हैं। मैं
उन्हें क्यों रोकूं ?"*
- "If he (The Mogul) was told of their planting stockade and putting
a sort of fortification there, why should he trouble himself regarding it?