भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभारत में यूरोपियन जातियों का प्रवेश ६
भारत से पुर्तगालियों की सत्ता के इतनी जल्दी मिट जाने का
एक सबब यह भी बताया जाता है कि बहुत अधिक धनाढ्य हो
जाने से ये लोग भोग विलास में पड़ गए थे। एक पुर्तगाली लेखक
लिखता है:—
“पुर्तगालनिवासियों ने एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में सलीब
(क्रॉस) लेकर भारतवर्ष में प्रवेश किया, किन्तु जब उन्हें यहाँ बहुत अधिक
सोना नज़र आया तो उन्होंने सलीब को अलग रखकर उस हाथ से अपनी
जेबें भरनी शुरू कर दीं और जब उनकी जेबें इतनी भारी हो गईं कि वे उन्हें
एक हाथ से न सँभाल सके तो उन्होंने तलवार भी फेंक दी। इस हालत में
जो लोग उनके बाद आए वे आसानी से उन पर हावी हो सके।*”
पुर्तगालियों के क़रीब सौ साल पीछे १६ वीं सदी के अंत में,
एक दूसरे यूरोपियन देश हॉलैण्ड के रहने वाले, जिन्हें “डच” कहते
हैं भारत पहुँचे। इन लोगों ने आसानी से पुर्तगालियों के रहे सहे
जहाज़ आदि जलाकर उनकी बाक़ी सत्ता अपने हाथों में ले ली।
आज दिन पुर्तगालियों का राज हिन्दोस्तान के अंदर केवल गोआ
और दो एक छोटे छोटे टापुओं पर बाक़ी रह गया है।
यूरोप में डच लोगों ने भारत के धन वैभव का ज़िक्र पहले
पहल पुर्तगालियों से सुना। उनके दिल में भी
भारत में भारत पहुंच कर धन कमाने की अभिलाषा पैदा
डच जाति हुई। जल-मार्ग से भारत आने के उन्होंने अनेक
- Alfonzo-de-Souza, Governor of Portuguese India, 1545.