भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 205, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ेंमुग़लों का समय १७३
प्राचीन भारतीय सभ्यताओं या अरब और ईरान की विदेशी सभ्यताओं
दोनों के सर्वोच्च गुण लिए हुए, उन सब से ऊँची थी । हिन्दू अपने प्राचीन
जात पाँत के भेदों, अनेक तरह के देवी देवताओं की पूजा, आडम्बरयुक्त
कर्मकाण्ड, पुरोहितों के प्रभुत्व, असंख्य अन्धविश्वासों और सदियों की
सङ्कीर्णता को तिलाञ्जलि दे, मानव समता, एक ईश्वरवाद और प्रेम और
सदाचार के महत्व की ओर बढ़ते हुए दिखाई दे रहे थे । भारत का इसलाम
अरब के प्रारम्भिक इसलाम से भिन्न एक नई ही सुन्दर वस्तु बन रहा था
और मुसलमान सूफ़ी हिन्दुओं के अनेक उच्च दार्शनिक सिद्धान्तों और योग
प्राणायाम जैसी विधियों को अपना कर उन्हें इसलाम का एक अङ्ग बना रहे
थे । कबीर, दादू, नानक और बाबा फ़रीद जैसे सैकड़ों हिन्दू और
मुसलमान फ़क़ीर महात्मा अलग अलग धर्मों और सम्प्रदायों की बनावटी
और हानिकर दीवारों को तोड़ कर मनुष्य मात्र को प्रेम का और एक
सार्वजनिक उच्चतम सच्चे मानव धर्म का उपदेश दे रहे थे । शिल्प, विज्ञान,
कला कौशल, साहित्य और सामाजिक रहन सहन में नए और उच्चतर
आदर्शों का प्रादुर्भाव हो रहा था । भारत की विविध प्रान्तीय भाषाएँ पहली
बार अपने अन्दर उच्च और स्फूर्तिदायक साहित्य को जन्म दे रही थीं ।
समस्त देश सुख चैन और ख़ुशहाली की ओर बढ़ रहा था । एक देश और
एक राष्ट्र के भाव मानव प्रेम के रंग में रङ्ग कर समस्त भारत को एक समान
उच्चतर और पवित्रतर जीवन की ओर ले जा रहे थे ।
सम्राट अकबर
लगातार कई सौ साल से बढ़ते हुए और लहलहाते हुए इस राष्ट्रीय
वृक्ष का सब से सुन्दर, सब से महान और सब से गौरवान्वित पुष्प सोलवीं