भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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मुन्शी श्रीराम ने अपनी पुस्तक में उर्दू के अनेक हिन्दू कवियों की सूची दी
है। हिन्दी, मराठी, बङ्गला इत्यादि समस्त भारतीय भाषाओं पर मुसलिम
शासन, फ़ारसी और तुरकी शब्दों और मोहावरों का अभी तक अमिट
प्रभाव मौजूद है।
साहित्य और विज्ञान की उन्नति
विज्ञान के मैदान में भी भारत की वैद्यक, गणित और ज्योतिष ने
आरम्भ के दिनों में अरब विचारों और अरब पुस्तकों द्वारा यूनानी वैज्ञानिक
विचारों से अपने ज्ञान कोष को ख़ासी उन्नति दी। सत्रवीं सदी के अन्त
या अठारवीं सदी के शुरू में महाराजा जयसिंह ने हिन्दू पञ्चाङ्ग का सुधार
करने के लिये जयपुर, मथुरा, देहली और बनारस में मान मन्दिर बनवाए
और अरबी ग्रन्थ 'अलमजस्ती' का संस्कृत में अनुवाद कराया। भारतीय
वैद्यक ने अनेक नई चीज़ें, ख़ासकर तेज़ाबों और कीमिया के क्षेत्र में, अरबों
से सीखीं। कई तरह के नए धंधे मसलन काग़ज़ बनाना, क़लई करना,
चीनी मिट्टी के बरतन और कई तरह के धातों के काम भारत में मुसलमानों
के समय से प्रचलित हुए। इसी तरह वस्त्रों, भोजन, सङ्गीत, रहन सहन
इत्यादि में भी मुसलमानों के समय में भारतीय जीवन में गहरे और बहु-
मूल्य परिवर्तन हुए।
वास्तव में जैसा हम ऊपर लिख चुके हैं, भारत के अन्दर उस समय
जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में एक नई समन्वयात्मक सभ्यता का विकास हो रहा
था, जो न हिन्दू थी न मुसलमान, न वैदिक थी न बौद्ध, बल्कि जो शुद्ध
भारतीय थी, इन सब अलग अलग सभ्यताओं के मेल से बनी थी और जो