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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

पृष्ठ 182, कुल 727 में से

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पृष्ठ 182

१५० पुस्तक प्रवेश
औरंगज़ेब का एलान
सन् १६७३ में सम्राट् औरंगज़ेब ने अपने साम्राज्य भर में एक एलान
प्रकाशित किया, जिसमें ५४ चीज़ों की एक सूची दी गई थी और लिखा
था कि इनमें से किसी के ऊपर प्रजा से किसी तरह का महसूल आदि न
लिया जाय । इसी एलान में सम्राट् ने राज कर्मचारियों और ज़मींदारों को
आज्ञा दी कि किसी किसान से किसी तरह की भी 'भेंट या बेगार' न ली
जाय । इन ५४ चीज़ों में मछली, तेल, घी, दूध, दही, उपले, तरकारियाँ,
घास, ईंधन, मिट्टी के बरतन, ऊँट, गाड़ियाँ, चरागाह, सड़कों की रहदारी
का महसूल, नदियों के घाटों का महसूल, रुई, गन्ना, रस, कपड़े की छपाई,
इत्यादि भी शामिल थीं। इसी एलान में लिखा था कि गंगा या अन्य
तीर्थों में नहाने वालों से या अपने मुर्दों की अस्थियाँ गंगा में ले जाने वाले
हिन्दुओं से किसी तरह का महसूल न लिया जाय ।
इस तरह की आज्ञाएँ सम्राट अकबर के समय से लेकर बराबर निकलती
रहती थीं । हर नए सम्राट को अपने तख़्त पर बैठने के समय या कभी कभी
अपने शासन काल में एक से अधिक बार उन्हें इसलिए दोहराते रहना या
कभी कभी बदलना पड़ता था ताकि कोई सामन्त या कर्मचारी इस विषय
में असावधान न हो जाय । जदुनाथ सरकार लिखता है—
“उस समय के इतिहासों और पत्रों से ज़ाहिर है कि मुग़ल
साम्राज्य के अधिराज की नीति सदा यही होती थी कि रय्यत पर
किसी तरह का अत्याचार न होने पाए । यह बात साबित की
जा सकती है कि यह नीति केवल एक शुभ कामना ही न थी,
बल्कि यही उस समय की सच्ची हालत थी । शाहजहाँ और