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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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मुग़लों का समय १५१
औरंगज़ेब के समय की अनेक ऐसी घटनाएँ उस समय के इतिहास
में मिलती हैं, जिनमें कि ज्योंही माल के मोहकमे के किसी
कर्मचारी, या किसी प्रान्त के सूबेदार की सख़्ती या ज़बरदस्ती की
कोई शिकायत प्रजा की ओर से सम्राट के कानों तक पहुँची,
तुरन्त उस राजकर्मचारी को या उस सूबेदार तक को बरख़ास्त
कर दिया गया।”*
ऊपर के लेखक ने एक फ़ारसी दस्तावेज़ से मिसाल के तौर पर एक
घटना नक़ल की है, जिससे "साफ़ पता चलता है कि शाहजहाँ किसानों के
साथ इन्साफ़ करने, बल्कि उदारता का व्यवहार करने के लिए कितना
उत्सुक था।"
शाहजहाँ और किसान
एक दिन शाहजहाँ साम्राज्य के माल के काग़ज़ात का मुआयना कर
रहा था। उसने देखा कि किसी गाँव की उस साल की मालगुज़ारी पिछले
वर्षों की मालगुज़ारी से कई हज़ार अधिक दर्ज है। तुरन्त माल के मोहकमे
के प्रधान अफ़सर दीवाने आला सादुल्ला ख़ाँ को तलब किया गया। सम्राट
ने दीवान से मालगुज़ारी के बढ़ने की वजह पूछी। तहक़ीक़ात कराने पर
मालूम हुआ कि उस साल गाँव के पास की नदी कुछ पीछे को हट गई

  • "The policy of the supreme head of the Mughal Government not to
    commit any exaction on the ryot is manifest from the contemporary histories
    and letters, and can be proved to have been a reality and not merely a pious
    wish. Several instances are recorded in the reigns of Shah Jahan and
    Aurangzeb in which harsh and exacting revenue collectors and even pro-
    vincial viceroys were dismissed on the complaints of their subjects reaching
    the Emperor's ears. "-Ibid, p. 108