भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबहिर्राम भट्ट सत्य की खोज में दो दफ़े हिन्दू से मुसलमान और
मुसलमान से हिन्दू हुआ । अन्त में उसने कहा—"न मैं हिन्दू हूँ और न
मुसलमान ।”
शेख मोहम्मद
दक्खिन के अन्दर शेख मोहम्मद एक बहुत बड़ा भक्त हुआ है। उसके
अनुयायी रमज़ान के रोज़े भी रखते हैं और एकादशी का व्रत भी, मक्के की
भी यात्रा करते हैं और पण्डरपुर के मन्दिर की भी ।
तुकाराम
सन्त तुकाराम दक्खिन का शायद सब से अधिक सर्वमान्य भक्त था ।
कबीर इत्यादि के समान तुकाराम जात पाँत, मूर्तिपूजा, यज्ञ, हवन और
अन्य कर्मकाण्ड का कट्टर विरोधी और एक हरि की भक्ति का प्रचारक था ।
प्रत्येक प्राणी के रूप में उसे हरि ही दिखाई देता था । इस्लाम और हिन्दू
धर्म को मिलाने का तुकाराम का प्रयत्न उसके एक पद्य से ज़ाहिर है जिसका
भाषान्तर यह है—
जो 'अल्लाह' चाहता है, ऐ मेरे बाबा ! वही होता है ।
सब का बनाने वाला सब का बादशाह है। पशु और मित्र, बग़ीचे
और माल, सब जाते रहेंगे । ऐ बाबा ! मेरा चित्त मेरे 'साहेब'
पर लगा है। वही मेरा बनाने वाला है । मैं मन के घोड़े पर
सवार हूं और आत्मा सवारी करती है। ऐ बाबा ! अल्लाह का
ज़िक्र करो, सब उसी के रूप हैं । तुका कहता है, जो मनुष्य इस
बात को समझे, वही दरवेश है ।
बड़े नामों में सब से पहला नाम 'अल्लाह' है । उसे सदा