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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

पृष्ठ 162, कुल 727 में से

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पृष्ठ 162

५३२ पुस्तक प्रवेश
गिराने पर वह टूट क्यों जाता ? जो लोग पत्थर के बने हुए
देवता की पूजा करते हैं वे अपनी मूर्खता से सब कुछ खो बैठते
हैं। जो लोग ये कहते हैं और जो ये सुनते हैं कि पत्थर का
देवता अपने भक्तों से बातचीत करता है, वे दोनों मूर्ख हैं।
× × ×।"*
नामदेव के अनेक शिष्यों और अनुयाइयों में पुरुष और स्त्री, हिन्दू
और मुसलमान, ब्राह्मण और मराठा, कुनबी, दरज़ी और कुम्हार यहाँ तक
कि अन्त्यज, महार और धर्मनिष्ठ वेश्याएँ तक शामिल थीं।†
चोखमेला और बहिराम
नामदेव का एक महार शिष्य चोखमेला जिस समय पण्डरपुर के मशहूर
मन्दिर में जाने लगा और ब्राह्मण पुरोहित ने उसे मना किया तो चोख-
मेला ने उत्तर दिया—
“उच्च जाति में पैदा होने से क्या लाभ × × × चाहे मनुष्य
नीच जाति का भी हो, किन्तु यदि वह दिल का सच्चा है, ईश्वर से
प्रेम करता है, सब प्राणियों को अपने समान समझता है, अपने
और दूसरों के बच्चों में कोई भेद भाव नहीं रखता, और सच बोलत .
है, तो उसकी जाति पवित्र है और ईश्वर उससे प्रसन्न है। जिस
मनुष्य के हृदय में ईश्वर पर विश्वास है और मनुष्य के साथ प्रेम
है, उससे जाति कभी न पूछो। ईश्वर अपने बच्चों से प्रेम और
भक्ति चाहता है, वह उनकी जाति की परवा नहीं करता।।”‡

  • Bhandarkar : Vaishnavism
    † Ranade : Rise of the Maratha Power, p. 146
    ‡ Ibid p. 154