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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 164

१३४ पुस्तक प्रवेश
दोहराते रहो, भूलो नहीं। सचमुच अल्लाह एक है, सचमुच नबी
एक है, वहाँ तू भी एक है, वहाँ तू भी एक है, वहाँ तू भी एक
है ! वहाँ न मैं हूँ और न तू है ! ❀
निस्सन्देह हिन्दूमत, बौद्धमत और इसलाम के मेल से उस समय
भारत के अन्दर उत्तर से दक्खिन तक और पूर्व से पच्छिम तक एक सुन्दर
सार्वजनिक मानव धर्म की नींव रक्खी जा रही थी, जिसका मूल मन्त्र
एकता, प्रेम और सब की सेवा था।
भारतीय कला और मुसलमान
निर्माणकला
जिस तरह धार्मिक विचारों पर उसी तरह भारतीय निर्माणकला
और भारत की चित्रकारी पर भी मुसलमानों के आने का बहुत गहरा और
हितकर प्रभाव पड़ा। प्रोफ़ेसर जदुनाथ सरकार लिखता है कि मुसलमानों
के समय में भारत की निर्माणकला ने साफ़ उन्नति की।
ईसा की आठवीं सदी तक भारतीय शिल्पकला पर बौद्धमत का ख़ास
असर था। आठवीं से तेरहवीं सदी तक इस कला में हिन्दू आदर्शों की
प्रधानता रही, किन्तु फिर भी बौद्धमत का प्रभाव उस पर साफ़
दिखाई देता रहा। हम इस विषय की वैज्ञानिक बारीकियों में पड़ना नहीं

  • Tukaram's Abhanga, p. 85, 86, Godbole's edition.