भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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प्राणनाथ
औरंगज़ेब के अन्त के दिनों में प्राणनाथ और धरनीदास के नाम भी
मशहूर हैं। प्राणनाथ ने अपनी गुजराती पुस्तक 'कुलज़ुम सरूप' में वेदों
और क़ुरान दोनों से हवाले देकर दोनों के सिद्धान्तों की समानता दर्शाई
है। प्राणनाथ जाति भेद, मूर्तिपूजा और ब्राह्मणों के प्रभुत्व के विरुद्ध था ।
उसके अनुयाइयों में हिन्दू और मुसलमान दोनों थे। और हर नए दीक्षा
लेने वाले को हिन्दू और मुसलमान दोनों के साथ बैठ कर भोजन करना
पड़ता था। यही उनकी दीक्षा थी। प्राणनाथ की एक ख़ास पुस्तक 'क़यामत
नामा' है, जिसमें उसने साफ़ लिखा है कि—"तुम सब का, चाहे हिन्दू
हो या मुसलमान, एक ईमान होना चाहिए।" इस पुस्तक में उसने यहूदी,
ईसाई, मुसलमान और हिन्दू सब के पीर, पैग़म्बरों और महात्माओं की
जीवनियाँ दी हैं और सब में मौलिक समानता दर्शाई है। ईश्वर के लिए
उसने अल्लाह और खुदा दोनों नामों का उपयोग किया है ।
अन्य प्रयत्न
जगजीवनदास, बुल्ला साहब, केशव, चरनदास, सहजोबाई, दयाबाई,
ग़रीबदास, शिवनारायन, रामसनेही इत्यादि के उपदेशों का भी ठीक यही
सार था । जगजीवन के शिष्यों में ब्राह्मण, ठाकुर, चमार और मुसलमान,
सब जातियों के लोग शामिल थे । बुल्ला साहब के उपदेशों में फ़ारसी के
शब्द और सूफ़ी परिभाषाएँ भरी हुई हैं । बुल्ला साहब और केशव दोनों,
दिल्ली के एक मुसलमान फ़क़ीर यारी साहब के शिष्य थे । मुसलमान
फ़क़ीरों के हिन्दू शिष्य और हिन्दू फ़क़ीरों के मुसलमान शिष्य उन दिनों
लाखों की तादाद में पाए जाते थे । सहजो और दयाबाई दोनों स्त्रियाँ थीं