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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 153

मानव धर्म १२३
(८) तम्बाकू और मादक द्रव्यों से बचो । किसी मूर्ति के सामने सिर
मत झुकाओ ।
(६) किसी की जान मत लो, किसी को कष्ट मत पहुंचाओ ।
(१०) एक पुरुष के लिए केवल एक स्त्री और एक स्त्री के लिए केवल
एक पुरुष ।
(११) साधुओं की सङ्गत ही तीर्थ है । और
(१२) किसी तरह के अन्ध विश्वासों, नजूम, शकुन, इत्यादि को
न मानो ।
निस्सन्देह ये हुकुम उस समय के हिन्दू धर्म और इसलाम दोनों के
सर्वोच्च सिद्धान्तों को मिलाकर रचे गए थे ।
दाराशिकोह का गुरु बाबालाल
औरंगज़ेब के भाई दाराशिकोह का गुरु बाबालाल भी इसी तरह के
विचारों का मनुष्य था । दाराशिकोह और बाबालाल की बातचीत एक
फ़ारसी किताब 'नादिर-उन-निकात' में दर्ज है । बाबालाल ने अपने
सिद्धान्तों के समर्थन में जगह जगह फ़ारसी कवि हाफ़िज़ के हवाले दिए हैं ।
नारायनी सम्प्रदाय
इसी तरह उस समय की और भी अनेक सम्प्रदायों ने हिन्दुओं और
मुसलमानों को मिलाने की पूरी कोशिश की । नारायनी सम्प्रदाय में हिन्दू
और मुसलमान दोनों एक समान लिए जाते थे । ये लोग पूरब की तरफ़
मुँह करके दिन में पाँच बार ईश्वर प्रार्थना करते थे । उनके ईश्वर के नामों
में एक नाम अल्लाह भी था । वे अपने मुरदों को दफ़न करते थे, इत्यादि ।