भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमानव धर्म ११६
दोनों भाई हाथ पग, दोनों भाई कान।
दोनों भाई नैन हैं, हिन्दू मूसलमान॥
ना हम हिन्दू होहिंगे, ना हम मूसलमान।
षट दरशन में हम नहीं, हम राते रहिमान॥
हिन्दू लागे देहुरे, मूसलमान मसीत।
हम लागे इक अलख सों, सदा निरन्तर प्रीत॥
ना तहं हिन्दू देहुरा, ना तहं तुरक मसीत।
दादू आपे आप है, नहीं तहां रह रीत॥
यहु मसीत यहु देहुरा, सतगुरु दिया दिखाय।
भीतर सेवा बन्दगी, बाहरि काहे जाय॥
दून्यू हाथी द्वै रहे, मिलि रस पिया न जाय।
दादू आपा मेटिकर, दून्यू रहे समाय॥
' यानी हिन्दू या मुसलमान सब के घट में एक ही आत्मा है।
अल्लाह और राम एक है मेरा भ्रम दूर होगया, हिन्दू और मुसलमान
में कोई भेद नहीं है। सब में मुझे तू ही तू दिखाई देता है।
ब्रह्मा, विष्णु और महेश का पन्थ क्या है, मोहम्मद का दीन क्या है,
जिबराईल का क्या मार्ग है, एक अल्लाह उन सब का पीर और मुर्शिद है।
दादू अपने दिल में जानता है कि वे सब किसके हैं, वही अलख इलाही
सारी दुनिया का गुरु है, उसके सिवा और कोई नहीं।