भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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हैं, वहीं पर उसका मुल्ला इमाम है, अलख ईश्वर को सामने खड़ा करके
वहीं पर वह सिजदा करता है और सलाम करता है ।
दादू अपने समस्त शरीर को तसबीह (माला) बना कर उस पर
‘करीम’ का नाम जपता है, उसका केवल एक रोज़ा है और वह स्वयं
अपना ‘कलमा’ है ।
इस तरह दादू अल्लाह के सामने एकाग्र होकर आठ पहर खड़ा रहता
है और अर्श के ऊपर ‘रहमान’ के रहने की जगह पहुंच जाता है ।
नीचे के पद्यों में दादू ने धार्मिक सङ्कीर्णता का विरोध, हिन्दू मुस्लिम
एकता का प्रतिपादन और एक सच्चे सार्वभौम धर्म का उपदेश दिया है ।
ज़ाहिर है कि सूफ़ियों से उसने भरपूर शिक्षा ग्रहण की थी । वह लिखता है—
सब घट एकै आतमा, क्या हिन्दू मूसलमान ।
अलह राम छूटा भ्रम मोरा ।
हिन्दू तुरक भेद कछु नाहीं, देखौं दरसन तोरा ॥
ब्रह्मा विस्नु महेस को कौन पन्थ गुरुदेव ।
महम्मद किसके दीन में, जबराइल किस राह ।
इनके मुर्शिद पीर को, कहिए एक अल्लाह ॥
ये सब किसके ह्वै रहे, यह मेरे मन माँहि ।
अलख इलाही जगत गुरू, दूजा कोई नाँहि ॥