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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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जिज्ञासु अरब ८५
ऊपर खींच चुके हैं, शेष भारतवासियों के विचारों, उनके धर्म, उनके साहित्य,
उनकी चित्रकारी, उनके विज्ञान, उनकी निर्माण कला, सारांश यह कि
समस्त भारतीय सभ्यता पर इस्लाम के नए विचारों का गहरा और अमिट
प्रभाव पड़ा। किन्तु इस प्रभाव को बयान करने से पहले यह आवश्यक है
कि हम मोहम्मद साहब के बाद की अरबों के अन्दर की नई धार्मिक लहरों
और उनकी सभ्यता के अन्य पहलुओं पर भी एक नज़र डाल लें ।
इस्लाम आरम्भ से ही एक ईश्वर का मानने वाला था। उसके सिद्धान्त
अत्यन्त सरल थे और पूजा विधि अत्यन्त सुसाध्य । फिर भी मोहम्मद साहब
की मृत्यु के थोड़े दिनों बाद से ही इस्लाम के अन्दर नई नई शाखें फूटने
लगीं। जिस तरह अरब नीतिज्ञों ने पूरब और पश्चिम में अपने साम्राज्य
को बढ़ाना शुरू किया, उसी तरह अरब विद्वानों और जिज्ञासुओं ने संसार
के चारों कोनों से दर्शन, विज्ञान और अनेक विद्याओं की खोज कर अपने
भण्डार को बढ़ाना शुरू किया ।
बौद्ध और हिन्दू ग्रन्थ अरबी में
ईसाई धर्म ग्रन्थों के अरबी में अनुवाद किए गए। सुक़रात, अफ़लातून
और अरस्तू जैसों के गूढ़ दर्शनशास्त्रों, और विज्ञान, वैद्यक, ज्योतिष
इत्यादि पर यूनानी ग्रन्थों के अरबी में अनुवाद किए गए। भारत के साथ
अरबों का घनिष्ठ सम्बन्ध पहले से था ही। भारतीय माल के साथ साथ
भारतीय संस्कृति और भारतीय विद्याओं का लेन देन भी शीघ्र ही शुरू हो
गया। शुरू के ख़लीफ़ाओं के दिनों में अनेक हिन्दू बसरा में ऊँचे ऊँचे पदों
पर नियुक्त थे ।* शाम, काशगर इत्यादि में हिन्दुओं की अनेक बस्तियाँ

  • Jean Perier : Vie d'al Hadjdjadg Ibn Yusuf, p. 249-52.