भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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थीं। खुरासान, अफ़गानिस्तान, सीसतान और बलूचिस्तान इसलाम मत
स्वीकार करने से पहले बौद्ध थे या हिन्दू। बलख़ में एक बहुत बड़ा बौद्ध
विहार था, जिसके बौद्ध मठाधीश अब्बासी ख़लीफ़ाओं के वज़ीर हुआ
करते थे।* बौद्धधर्म की सब मुख्य मुख्य पुस्तकों के अरबी में अनुवाद
किए गए। "किताबुल बुद्ध" और "बिल बहर वा बुदसिफ़" उन्हीं दिनों
की लिखी हुई अरबी भाषा में बौद्धधर्म की प्रामाणिक पुस्तकें हैं। इसी तरह
सुश्रुत, चरक, पञ्चतन्त्र, हितोपदेश, चाणक्य इत्यादि अगणित संस्कृत
ग्रन्थों के अरबी में अनुवाद किए गए। विशेषकर बुद्ध के जीवन और उसके
सिद्धान्तों का अरब के मुसलमानों पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा। धीरे धीरे
जिज्ञासु अरबों में तरह तरह के स्वतन्त्र विचार, नए नए दार्शनिक, और
नई नई सम्प्रदाएँ पैदा होनी शुरू हुईं। इसी परिस्थिति के अन्दर इसलाम
में अद्वैतवाद और सुप्रसिद्ध सूफ़ी विचारों का जन्म हुआ।
इसलाम में अद्वैतवाद
उन्हीं दिनों शिया मुसलमानों की 'गुलात' सम्प्रदाय के आचार्यों ने
अवतारवाद (हुलूल, तशबीह), आवागमन (तनास्रुख़) इत्यादि को
अपने सिद्धान्तों में स्थान दिया और यह प्रतिपादन किया कि मनुष्य की
आत्मा भी बढ़ते बढ़ते ख़ुदा के रुतबे तक पहुँच सकती है। 'अली इलाही'
सम्प्रदाय के लोगों ने एक से अधिक स्त्री के साथ विवाह और तलाक़ की
प्रथा दोनों को नाजायज़ क़रार दिया। मसजिद में जाना और शारीरिक
'शरई' पवित्रता को भी उन्होंने अनावश्यक बताया। अनेक सम्प्रदायों ने
क़ुरान के ज़ाहिरा अर्थों को न मान कर उसे अलङ्कार के रूप में मानना शुरू
- Nicholson : A Literary History of the Arabs, p. 259