भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)
Bhakti Sagar Granth of Swami Charandas
सन्त चरनदास जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५० श्रीस्वामीचरणदासजीकाग्रन्थ ।
करणीही सों पाइये, पारब्रह्म का खोज ।
सतगुरु पै चलि जाइये, मेटै सबही सोज ॥
इच्छाब्रह्म करी सोइ करणी । ईश्वर रूप धरालै धरणी ॥
महतत् करि अहँकार जुकीये । तीनरूप^१ उनको करिदीये ॥
राजस^२ तामस^३ सात्त्विक^४ जानौ । एही त्रैगुण मनमें आनौ ॥
राजस सों जगको उपजावै । सात्त्विक सों पालै सिरजावै ॥
तामस सों विनशावै तोड़ै । बहुत सृष्टि नहिं भूपर जोड़ै ॥
जोड़ै तौ वह कहां समावै । धरती का परमाण^५ कहावै ॥
योजन पचास क्रोड़ बताई । वेद पुराणन में जो गाइ ॥
धरती करणीही सों ठाढ़ी । कछुवा शेष भये जो आढी ॥
करणीही सों घन वरसावै । वादल मिलती पवन चलावै ॥
दो० करणी सों करतारही, धरा ब्रह्म का नावँ ।
माया भी तौ उन करी, खेली बहु विधि दावँ ॥
कोई निराकार बतलावै । कोई निर्गुण कहि समझावै ॥
कोइ कहै दोनों से न्यारा । है जु अकर्त्ता अलख^६ अपारा ॥
कहैं कि माया कियो पसारा । जेता दीखै यह संसारा ॥
तौ कहु माया कितसों आई । अन्त यही हरिने उपजाई ॥
वही सृष्टि का कारण काजा । वाने जगत प्यारकरि साजा ॥
देह देह में वह दरशावै । चतुर हो चतुराई पावै ॥
जैसे बरतन गढ़ै कुम्हारा । सव में दीखै सिरजनहारा^७ ॥
चित्र^८ मध्य चित्रामी सूझै । सुरति लगाय लगाय उरूझै ॥
जवहीँ बनी वनाई नीकै । कहि शुकदेवजु अपने जीकै ॥
१ ब्रह्मा विष्णु महेश २ रजोगुण ब्रह्मा ३ तमोगुण शिव ४ सतोगुण विष्णु
५ अंदाज ६ न देखपड़नेवाला ७ बनानेवाला ८ तस्वीर ॥