भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)
Bhakti Sagar Granth of Swami Charandas
सन्त चरनदास जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकुरुक्षेत्रलीलावर्णन । ५२५
मनमोहन कर प्रीत अंक में भर लई ॥
हित कै फेरत हाथ पीठ और देह पै ।
हेरत हरि को रूप सबै अति नेह कै ॥
लै लै उनको नाम जु श्याम बुलावई ।
देख दूवरो गात आंसू भर आवई ॥१९॥
गायन नांते कहत श्याम बहु प्रीति सों ।
हरषत सगरे लोग देख इह रीत को ॥
नांतिन घूमर गाय की यह खञ्जन भली ।
जिन सुख दीन्हो मोहिं बहुत हमसों हिली ॥
बेटी काजर गाय की धौरी जानिए ।
धौरी की सिरमौरी सुता पिछानिए ॥
ब्रजवासिन को प्रेम सबन सों आगरो ।
चरणदास भागोत में देख उजागरो ॥
कही न कैहूँ जाय श्याम की गुन कथा ।
जैसे सो त्यों मिले सकल जीवन जथा ॥
द्वारा बासी लोग सकल अचरज करैं ।
देखत रस संजोग हिये आनन्द भरैं ॥
बलदाऊ और श्याम चले आनन्द सों ।
ब्रजबासी ले संग सुतारे चंद ज्यों ॥
वाहन नाना भांत सब तहां आढ्या ।
राज तेज की चालसों ठाठ चलाइया ॥२०॥
हेम छरी कर मांहिं जुरत नजराइया ।
ते राजन के गात पौरयन लाइया ॥
ब्रजबासी सब लोग जु पहुंचे आय के ।
उतरे सबही जाय निकट जदुराय के ॥