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सर्वकोश
भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)

भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)

Bhakti Sagar Granth of Swami Charandas

सन्त चरनदास जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished690 पृष्ठ

पृष्ठ 562, कुल 690 में से

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पृष्ठ 562

कुरुक्षेत्रलीलावर्णन । ५२१
जैसे बालक होय मचलगए चैनसों ॥
देखत मोहनलाल उठे घुरराय कै।
तबहीं पकरे पांव नन्द के आय कै॥
गदगद बानी कंठ बात नहिं कहसकै ।
ए कहा जानें रोय श्याम मुख सब लखै ॥
इक कूकत इक कूदत धरती में परैं ।
एक मगन हरि दरसतें सुध बुध ना धरैं ॥
कहैं एक हम धन्य लखे गोपाल जू ।
एक कहे छांड़ो भीर लखें नन्दलाल जू ॥ १३ ॥
ऊपर गिरत संभार बहुर पग कों धरे ।
योंही सुरन अकास विमानन सों भरै ॥
चेते जब सुध आय आपने मातकी ।
अद्भुत लीला मिलन बधाई तात की ॥
जिंह नाते के लोग भांत वाही मिले ।
अन नाते हू मिलत कमोदन ज्यों खिले ॥
ना कोऊ नातो मानैं न मन में आनई ।
लोकलाज व्योहार नहीं पहिचानई ॥
ठेल पेल इक कूद निकस के धावई ।
परसत मोहन पाय परम सुख पावई ॥
एक दौर घनश्याम कों कहत सुनाय कै ।
हा हा मोहिं दिखाव लखैं चित लायकै ॥
कहैं एक हम देखें सुन्दर मोहना ।
रूप सरूप अनूप चित्र ज्यों सोहना ॥
कहैं एक मिल झुण्ड जाय हूं धाय कै।
दौर गहूंगी पाय माथ सिर नायकै ॥ १४ ॥