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सर्वकोश
भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)

भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)

Bhakti Sagar Granth of Swami Charandas

सन्त चरनदास जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished690 पृष्ठ

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पृष्ठ 532

माखनचोरीलीला वर्णन । ४६१
एक और बालक खरो ताकी पकरी बांह ।
ग्वारिन के कर दियो भेद लख्यो कोऊ नाहिं ॥
अचरज गाइए तुम सुनियो सन्त सुजान ॥
अपनो हाथ छुटाय दौर माता ढिग आये ।
लीला अद्भुत देख परमसुख मैया पाये ॥
तब हंस यशोदा ने कह्यो कहो ग्वारिनी बात ।
किह कारण आई सबै घरमें है कुशलात ॥
अचरज गाइये तुम सुनियो सन्त सुजान ॥
जो देखें कर और कहैं यह बालक काको ।
हम गहलाई कुंवर कान्ह भयो अचरज जाको ॥
सवमिल खिसियानी भई कहन लगी मुखमोर ।
नाजाने इन कहा कियो ढोटा चित के चोर ॥
अचरज गाइये तुम सुनियो सन्त सुजान ॥
पूरण पुरुष अनादि ईश तिहुं पुर को स्वामी ।
घट घट व्यापक होय रहो हरि अन्तरयामी ॥
ताके कौतुक बहुत हैं कहांलों करूं बखान ।
चरणदास सुखदेवने कह्यो भागौत पुरान ॥
अचरज गाइये तुम सुनियो सन्त सुजान ॥
इति श्रीचरणदासजी कृत माखनचोरीलीला संपूर्णम् ॥