भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)

भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)
Bhakti Sagar Granth of Swami Charandas
सन्त चरनदास जी महाराज द्वारा
DevanagariHindipublished690 पृष्ठ
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जागरण माहात्म्य । ४८५
जे कलियुग में कीरतन करें। पावें सुख भवसागर तरें ॥
युगमरीति यह तोहिं बताई। सुन राजा तेरे हित गाई ॥
दो० इहि विधि श्रीभगवानने, राजहि कियो उपदेश ।
पद्मपुराण में यह कथा, कही व्यास योगेश ॥
पानी का सा बुलबुला, ऐसे सुख संसार ।
भवसागर के तरनकूं, कीरतन है ततसार ॥
पलपल छिनछिन अवध यह, घटत जात है सोय ।
शुकदेव कहें याकथा को, सुन लीजो सब कोय ॥
अहो शिष्य तोसों कही, अचरज कथा अनूप ।
शुकदेव कहैं कोई सुनै, देखे हरि को रूप ॥
श्री सतगुरु शुकदेवकूं, हितसों करूं परनाम ।
चरणदास कों दीजिये, चरणन में बिसराम ॥
इति श्रीचरणदासजीकृत जागरणमाहात्म्यं संपूर्णम् ॥