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सर्वकोश
भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)

भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)

Bhakti Sagar Granth of Swami Charandas

सन्त चरनदास जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished690 पृष्ठ

पृष्ठ 453, कुल 690 में से

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पृष्ठ 453

४१४ श्रीस्वामीचरणदासजीकाग्रन्थ ।
गुरु शुकदेव बताइया प्रेमी गति भारीहो ।
चरणदास चारौ वेदसों औरै कछु न्यारी हो ॥
रेखता राग भट्यार ॥
तजिकै जगतकी रीतिको करु आपनी तदबीर । इस जग
भरोसे ख्वारहो सुन यारमन ॥ यारमन गये शाह अमीर ।
एकदम करारी है नहीं क्षणक्षण में फेरैंरंग ॥ कबहूं तौ हैरां
सुखधना सुन यारमन । यारमन चल विचल बेढँग ॥ हश-
मत व शौकत थिर नहीं मत देखिहो मगरूर । ठहराव ताको
है नहीं सुन यारमन ॥ यारमन भग्गल बड़ाईधूर । जाहिं
श्वासा सबचले ज्यों आवदर गिरवाल ॥ याद साहबकी
करो सुन यारमन । यारमन सुमिर हरि हरि हाल ॥
शुकदेव सतगुरु ने मुझे कायम बतायो राम । चरणहिंदासा
चित धरो सुन यारमन ॥ यारमन जपौ आठौ याम ॥
रेखता ॥
दोदिनका जगमें जीवना करताहै क्यों गुमान ।
ऐबेशहूर गीदी टुक रामको पिछान ॥
दावा खुदीका दूरकर अपने तू दिलसेती ।
चलताहै अकड़ अकड़ जवानीका जोश आन ॥
मुरसदका ज्ञान समझिकै हुशियार हो शिताब ।
गफलतको छांड़ि सोहबत साधौंकी खूबजान ॥
दौलतकाजौम ऐसे ज्यों आब का हुबाब ।
जाता रहेगा क्षणमें पछितायगा निदान ॥
दिन रात खोवताहै दुनिया के कारबार ।
इकपलभि याद सांई कि करता नहीं अजान ॥