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सर्वकोश
भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)

भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)

Bhakti Sagar Granth of Swami Charandas

सन्त चरनदास जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished690 पृष्ठ

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पृष्ठ 426

शब्दवर्णन । ३८७
राग बिलावल ॥
करणी की गति और है कथनी की औरै ।
बिन करणी कथनी कथै बकवादी बौरै ॥
करणी बिन कंथनाइसी ज्यों शशिबिन रजनी ।
बिन शस्तर ज्यों शूरिमा भूषण बिन सजनी ॥
ज्यों पण्डित कथि कथि भले वैराग सुनावैं ।
आप कुटुम्ब के फँद पड़े नाहीं सुरझावैं ॥
बांझ झुलावै पालना बालक नहीं माहीं ।
वस्तु विहीना जानिये जहाँ करणी नाहीं ॥
बहुडिंभी करणी बिना कथि कथि करि मूये ।
सन्तौ कथि करणी करी हरिकी सम हूये ॥
कहैं गुरू शुकदेवजी चरणदास विचारौ ।
करणी रहनी दृढ़ गहौ थोथी कथनी डारौ ॥
हेली ॥
पांचसखी ले लार हेली काया महल पगधारिये ।
योग युक्तिडोला करौरी अरी हेली प्रान अपान कहार ॥
कुंज कुंज सब देखियेरी अरी हेली नानाबाग बहार ।
मानसरोवर न्हाइये सदा वसन्त निहार ॥
बिनासीप मोतीबनेरी अरीहेली बिनागूंद फूलनहार ।
बिन दामिनिं चमकारहै बिन सूरज उजियार ॥
अनहद उत बाजे बजैंरी अचरज बहुतक ख्याल ।
तेजपुंज की सेजपै कागा होहिं मराल ॥
श्रीशुकदेव कृपा करें जब पावै यह भेद ।
चरणदास पियासों मिलै छुटैं जगत के खेद ॥