भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)
Bhakti Sagar Granth of Swami Charandas
सन्त चरनदास जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें⸱ ३५६ श्रीस्वामीचरणदासजीकाग्रन्थ ।
चरणदास शुकदेव श्यामकी अद्भुत लीलापै बलिहारी ॥
रास राग भैरौं ॥
देख सखी रास रच्यो सांवरे बिहारी । ब्रह्मा शिव इन्द्र
शेष नारद से थकित भये ऐसो कवि कौन करै वरणन उप-
मारी ॥ सोहै सिर मुकुट और कुण्डल छवि तिलक भाल
किंकिण कटि पीताम्बर नूपुर झुनकारी । बहुत नारि सुघर
सखी राधाजू चन्द्रमुखी ललितादिक सह॑चरी श्रृङ्गार सों
सवाँरी ॥ कोऊ तँबूरा कोउ मुरचंग कोऊ बजावै गति मृदंग
कोऊ ताल देत कोऊ स्वर उठान भारी । बंसी में करत गान
बाँकीसी मधुरतान श्यामा जब करत मान श्यामलेँ मनारी ॥
कबहूं करजोर दोऊ नाचतहैं नवकिशोर कबहूँ हरि नृत्यकरत
कबहूं पियप्यारी । ता ता ता ता ता ता थेई थेई थेई द्वैरही बाढ़ी
निशि शरददेखि हरिकी नृतकारी ॥ गौवन तृण छाँड़ि दियो
बछरन पय नाहिं पियो मुरली धुनि सुनतमोहे मुनि जन व्रत
धारी शुकदेवजी गुरुकौं चरणदास बहु प्रनाम करै रास
को विलास दियो परगट दरशारी ॥
रास राग बिहागरा ॥
रास में निरत करत बनवारी ।
मुदित मनोहर रंग बढ़ावत सँग वृषभान दुलारी ॥
मोरमुकुट छवि शीश विराजत नाक बुलाक सुढारी ।
कर मुरली कटि काछनि काछे अलकैं घुंघुरवारी ॥
राधाजू के शीश चन्द्रिका नीलाम्बर जरतारी ।
गावैं सखी श्याम श्यामा सँग नखशिख रूप उजारी ॥
ताधिनां ताधिनां धीनां बजत पखावज ताल बीण गति न्यारी ।
१ सङ्गकी सहेली ॥