भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)
Bhakti Sagar Granth of Swami Charandas
सन्त चरनदास जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३५२ श्रीस्वामीचरणदासजीकाग्रन्थ ।
सोई नाम जपौ नरनारी ॥
नाम लेत प्रह्लाद उबारो ।
परगट है हिरणाकुश मारो ॥
पतित अजामिल सबजगजानै ।
नामलेत चढ़ि गयो विमानैं ॥
सुवा पढ़ावत गणिका तारी ।
नामलेत निजधाम सिधारी ॥
सोई नाम नारदमुनि गायो ।
वेदव्यास सुख प्रकट जनायो ॥
हरिके नाम को करो विचारा ।
सतसंगतिमिलि उतरौ पारा ॥
शिवब्रह्मादिक नाम उपासी ।
आठसिद्धिनवनाम किदासी ॥
शुकदेव गुरुने नाम बतायो ।
चरणदासहरिसों चितलायो ॥
राग बिलावल ॥
रामनाम चारों वेदको कहियत है. टीको ।
पाप ताप दुख द्वंद्वकूं मेटनकूं नीको ॥
एजी जेहि सुमिरे रक्षाकरी प्रहलाद उबारो ।
निर्गुण सों सर्गुण भयो जानत जग सारो ॥
एजी जप तप संयम योगमें सबहुन परभारी ।
नामलिये सबही तरैं बालक नर नारी ॥
एजी जो हिरदै दृढ़करगहै हरिदर्शन पावै ।
चौरासी बन्धन कटैं आवागमन नशावै ॥
एजी गुरु शुकदेव दयाकरी हरिनाम बतायो ।