भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)
Bhakti Sagar Granth of Swami Charandas
सन्त चरनदास जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशब्दवर्णन । ३४६
कमलनैन केशव^३७ मधुसूदन^३८ सबमें^३९ सबसे न्यारा^४० ॥
हृषीकेश^४१ मुरलीधर^४२ मोहन^४३ ॐ^४४ अखिल^४५ अयोन^४६ ।
भगवंत^४७ वासुदेव^४८ भगवाना^४९ ज्ञानी^५० ध्यानी^५१ मोनी^५२ ॥
दीनानाथ^५३ गोपाल^५४ हरी^५५ हरै गरुड़ध्वज^५६ घनश्यामा^५८ ।
भक्तिवछल^५९ अरु देवकिनन्दन^६० करता सब विधिकाम^६१ ॥
आदिप्रधान^६२ माधुरीमूरति^६३ धरणीधर^६४ बलवीरा^६५ ।
नन्दनंदन^६६ अरु यशोदानन्दन^६७ सुन्दर श्याम शरीरा^६८ ॥
परशुराम^६९ नरसिंह^७० विश्वंभर^७१ अचल^७२ अखण्ड^७३ अरू^७४पी ।
ईश^७५ अगोचर^७६ और जगतगुरु^७७ परमानँद^७८ बहुरू^७९पी ॥
करुणामय^८० कल्याण^८१ अनन्ता^८२ दयासिंधु^८३ वनवारी^८४ ।
धारण शंखचक्र^८५ रुकिमणि^८६पति आनंदकन्द^८७ विहा^८८री ॥
परमदयालु^८९ मनोहर^९० नरहरि^९१ कृपा^९२निद्धि फलदाता^९३ ।
कंसनिकन्दन^९४ रावणगंजन^९५ जगपति^९६ लक्ष्मीनाथा^९७ ॥
जगन्नाथ^९८ अरु बद्रीनाथा^९९ निरगुणं^१०० सरगुणं^१०१धारी ।
दा^१०२मोदर रघुवर^१०३ सीतापति रामा^१०४ कुंजविहा^१०५री ॥
दुष्टदलन^१०६ सन्तन्को रक्षक^१०७ सकल सृष्टिको ^१०८सांई ।
दुःखहरण के कौतुक अनगिन शेष पार नहिं पाई ॥
सौ अरु आठ नामकी माला जो नर मुखों उच्चारै ।
अपने कुलकी सारी पीढी एकअरुसौ को तार ॥
गुरु शुकदेव मंत्र निज दीन्हो रामनाम ततसारा ।
चरणदास निश्चय सों जपकरि उतरो भवजलपारा ॥
राग केदारा ॥
हरिको सुमिरि संकट हरन ।
कोटि कष्टनिवारि डारै जगत पोषण भरन ॥
भक्ति पूरण देखि निश्चल अनन्य बाधों परन ।