भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)
Bhakti Sagar Granth of Swami Charandas
सन्त चरनदास जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११० श्रीस्वामीचरणदासजीकाग्रन्थ ।
अथ श्रीचरणदासकृतज्ञानस्वरोदय
प्रारम्भः ॥
दो० नमो नमो शुकदेव जी, परणम करौं अनन्त ।
तुम प्रसाद स्वरभेद को, चरणदास वर्णन्त ॥
ऽ पुरुषोत्तम परमातमा, पूरण बिस्वा बीश ।
ऽ आदिपुरुषअविचल तुहीं, तोहिं निवाऊं शीश ॥
कुं० ऽक्षर ॐ सों कहत हैं अक्षर सोहं जान ।
ऽ निहअक्षर श्वासा रहितहै ताहि को मन आन ॥
ऽ ताही को मन आन रात दिन सुरति लगावो ।
ऽ आपा आप विचारि औरना शीश नवावो ॥
ऽ चरणदास मथि कहतहैं अगम¹ निगम² की सीख ।
ऽ यही वचन ब्रह्मज्ञान का मानो बिस्वाबीस ॥
ॐ सूं काया भई सोहं सो मन होय ।
निहअक्षर श्वासा भई चरणदास भल जोय ॥
चरणदास भल जोय खेंचि मनवाँ तहं राखौ ।
क्षर अक्षर निहअक्षर एकै दुबिधा नाखौ ॥
ऽ जब दरशै एकही एक भेष यह सभी तिहारो ।
ऽ डार पात फल फूल मूल सो सभी निहारो ॥
श्वासा सों सोहं भयो सोहं ॐकार ।
ॐ सों रर्रा भयो साधो करो विचार ॥
ऽ साधो करो विचार उलटि घर अपने आवो ।
ऽ घट घट ब्रह्म अनूप सिमिरि करि तहाँ समावो ॥
१ पुराण २ वेद ॥