भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
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शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
का साथ छोड़ने का साहस नहीं कर पायेंगे। 7 सितम्बर को सन्धि की शर्तें घोषित
कर दी गईं। मैं उसी दिन लौटकर डबलिन पहुँचा था। श्री सीनहागन, श्री
लियमलिंच आदि मुख्य योद्धाओं से मिला और गृहयुद्ध से बचने का एकमात्र उपाय,
शत्रु से फिर से भिड़ जाना ही उन्हें बताया। सभी ने सुना, परन्तु किसी ने इस पर
ध्यान न दिया। सभी लोगों का यह उपेक्षापूर्ण व्यवहार देखकर तथा सन्धि की शर्तों
को एकदम घृणित और असम्मानसूचक समझकर मैं आयरलैण्ड से कहीं दूर –
बहुत दूर जाने के लिए लालायित हो उठा। निश्चय किया, भारतवर्ष में जाऊँ। वह
देश भी हमारी तरह स्वतन्त्रता युद्ध में निमग्न है। शायद वहाँ दो हाथ दिखाने का
मौक़ा मिल जाये। परन्तु लन्दन स्थित भारतीय नेताओं ने हमें एकदम निराश कर
दिया। उन्होंने कहा, तुम लोगों ने अपने देश का सर्वनाश कर दिया। वे पराये लोग
तुम पर क्यों विश्वास करेंगे? फिर तो हम अमेरिका जाने की तैयारी करने लगे।
दिसम्बर के मध्य में श्री सीमस रोबिन्सन का विवाह हुआ। उसी के बाद
लन्दन की ओर चल दिया। चलते समय हृदय एकदम विदीर्ण हो उठा। आज हमारे
ही लोगों ने हमें संसार की नज़रों में गिरा दिया! वह क्या कहते होंगे? यही न कि
हमारी स्वतन्त्रता, हमारी आशा, जिसके लिए हमने इतना घोर रक्तपात किया था,
केवल आयरिश देश को विभिन्न भागों में विभाजित करा देना और एक विदेशी
सम्राट के प्रति भक्ति दिखाना था? छिः-छिः यह कैसी घृणित बात थी। इन्हीं
विचारों से विक्षिप्त होकर हम वहाँ से भाग जाना चाहते थे – वहाँ, जहाँ कि कोई
पहचान भी न पाये और हमारे मस्तिष्क की कालिमा लोगों के सामने प्रकट न हो
उठे। डबलिन छोड़ने के पूर्व मैंने अनेक प्रजातन्त्रवादी सैनिकों से, शत्रु से युद्ध छोड़ने
को कहा, उन्होंने मेरी यह बात न मानी। अगर उन्होंने मेरी सलाह मान ली होती
तो मैंने आयरलैण्ड कदापि नहीं छोड़ा होता। अन्त में मैंने यह भी कह दिया था कि
12 महीनों के दरम्यान अपने को गृहयुद्ध में निरत पायेंगे।
19 दिसम्बर को मैंने सीनमैक क्योन को एक खुली चिट्ठी लिखी थी। उसके
निम्नलिखित उद्धरण मेरे विचार को और भी स्पष्ट कर देंगे –
“महोदय! मैं आपको बता देना चाहता हूँ कि आनडायल में तथा इससे पहले
भी किसी स्थान पर आपने कहा था कि इस सन्धि के अनुसार आपकी
‘चिरवांछित’ स्वतन्त्रता आपको मिल गयी है तथा इसी के लिए आप आज तक
लड़ते रहे थे।
“परन्तु – मैं भी युद्ध में आपसे पीछे नहीं रहा हूँ। इसलिए यह कह देना चाहता
हूँ कि यदि हमें मालूम होता कि स्वतन्त्रता का यही आदर्श है तो सच कहता हूँ,
मैंने तथा मेरे साथियों ने बन्दूकों को छुआ तक न होता, न मैंने कभी किसी मृत
अथवा जीवित साथी को इसके लिए अग्रसर किया होता।
“आप स्मरण रखिये कि आज श्री मार्टिन सैबेज की बरसी का दिन है। क्या
746 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़
आप यह कल्पना करने का साहस करते हैं कि उस वीर ने एक ब्रिटिश गवर्नर
जनरल को मारने का प्रयत्न करते हुए केवल इसीलिए प्राण दे दिये कि उस गवर्नर
के स्थान पर कोई नया ब्रिटिश गवर्नर आ जाये।
“मैं अपने उन वीर सैनिकों की ओर संकेत करते हुए आपसे अनुरोध करूँगा
कि आप हमारे उसी 'अलेहदगी' तथा पूर्ण स्वतन्त्रता को ही अपना आदर्श
बनाये रहें।”
मैं और श्री हागन जिस किसी तरह बन पड़ा, पासपोर्ट लेकर अमेरिका चले
गये। वहाँ बहुत से परिचित अथवा अपरिचित मित्रों से भेंट हुई। शिकागो में अपने
भाई-बहन से भी मिला। खूब सैर की। सभी मित्रों ने खूब स्वागत किया। पर
सभी सुखी रहने पर भी आयरलैण्ड की चिन्ताजनक स्थिति से हर समय घबराये
रहते। नित्य नये झगड़ों के समाचार आते। मेरी 'गृहयुद्ध' सम्बन्धी भविष्यवाणी
ठीक होने लगी।
मार्च के शुरू में समाचार मिला, लिम्मर्क में मोर्चेबन्दी हो गयी। सन्धि के
समर्थक तथा विरोधी दो विभिन्न दलों में विभाजित हो गये हैं। मैं समझ गया कि
अब युद्ध किसी भी क्षण छिड़ सकता है। शीघ्र ही मुझे तार द्वारा बुलाया गया। मेरे
और हागन के सामने फिर वही धनाभाव तथा पासपोर्ट की असुविधा आ उपस्थित
हुई। कुछ मित्रों की सहायता से एक जहाज़ पर हम भरती हो गये। हमें कोयले
झोंकने का काम दिया गया। कुछ घण्टे कठिन परिश्रम भी किया, पर जहाज़ के
चलने में केवल एक घण्टा ही शेष था कि जहाज़ के किसी अधिकारी को सहसा
हागन पर सन्देह हो गया और गरीब पर नाम धाम, जाति, देश तथा इस काम का
पहले के अनुभव सम्बन्धी प्रश्नों की बौछार होने लगी। परिणामस्वरूप वह नीचे
उतार दिये गये। अब मैं क्या करूँ? इतने घण्टे का परिश्रम भी व्यर्थ गया और इस
समय उतरना भी असम्भव! श्री हागन को भी मैं ऐसी दशा में न छोड़ सकता था।
न जेब में पैसा, न किसी मित्र की आशा। अन्त में यही निश्चय किया कि उन्हें
छोड़कर मुझे नहीं जाना चाहिए। अब प्रश्न यह था कि जहाज़ से उतरूँ तो कैसे?
द्वार की ओर भागा! वहाँ एक अधिकारी महोदय खड़े थे – मिन्नत की कि किनारे
पर एक ज़रूरी कार्य है। अभी पाँच मिनट में आता हूँ। गरीब मज़दूर समझ वे दयार्द्र
हो उठे, मुझे उतर जाने दिया। इस प्रकार जहाज़ से उतर तो गया पर हमारी सारी
पूँजी वहीं रह गयी। हमने अपना सारा धन व्यय करके जो बन्दूकें खरीदी थीं, जहाज़
में ही रह गईं। पर मजबूरी थी। उसका तो कोई उपाय भी न था।
इसके बाद भी जहाज़ पाने के प्रयत्न में हमें कई बार निराश होना पड़ा। पर
अन्त में एक जहाज़ मिला और अप्रैल के आरम्भ में हम आयरलैण्ड पहुँचे। बन्दरगाह
में पहुँचते ही समाचार मिला कि मेरी श्रीमती अकेले ही नहीं बल्कि एक सुपुत्र
सहित घर में मेरी बड़ी प्रतीक्षा कर रही हैं।
आयरिश स्वतन्त्रता-संग्राम / 747
परिस्थिति बहुत ख़राब हो चुकी थी। प्रजातन्त्रवादी सेना दो विरोधी दलों में
विभाजित हो गयी। एक दल था, आयरिश प्रजातन्त्रवादी सेना का जो पूर्ण स्वतन्त्रता
के पक्ष में न था और दूसरा आयरिश फ़्री स्टेट दल था, जो सन्धि की स्वतन्त्रता
से ही सन्तुष्ट था। मोर्चेबन्दी हो गयी थी। मैंने इस गृहयुद्ध को रोकने का भरसक
प्रयत्न किया। सभी दलों के पास मारा-मारा फिरा। दोनों दलों में समझौता करने के
लिए कोशिशें की गईं। पर सब व्यर्थ हुईं। अन्त में चुनाव के सम्बन्ध में यह तय
हुआ कि यह दोनों दल एक-दूसरे का विरोध न कर, एक हों, सिनफिन दल के
नाम से चुनाव में भाग लें और चुनाव के बाद फिर से मन्त्रिमण्डल क़ायम करें।
यह समझौता दोनों दलों के प्रतिनिधि श्री एमन डी. वेलेरा तथा माईकेल कालिन्स
में हुआ था। माईकेल फ़्रीस्टेट के प्रतिनिधि थे। उनका व्यवहार बड़ा विचित्र था।
वे शीघ्रातिशीघ्र गृहयुद्ध प्रारम्भ करना चाहते थे और इन्हीं कारणों से यह समझौता
कुछ सफल न हुआ।
एक दिन एकाएक समाचार मिला कि फ़्रीस्टेट वालों ने अंग्रेज़ों की सहायता
से रिपब्लिकन (प्रजातन्त्रवादी) सेना कोर्ट से निकाल देने के लिए तोपें ला चढ़ायी
हैं। गृहयुद्ध का श्रीगणेश हो गया। मुझे भी रिपब्लिकन सेना का साथ देना पड़ा।
गृहयुद्ध का वेदनाजनक विवरण लिखने की इच्छा नहीं। इससे आयरलैण्ड को इतनी
अधिक हानि हुई, जितनी शायद अंग्रेज़ों के विरुद्ध वर्षों लड़ते रहने पर भी न हुई
थी। इस युद्ध में श्री लियमलिंच, श्री डिन्नी लेसी, श्री जैटी केली, श्री स्पर्की ग्रीन
आदि कितने ही वीरों के प्राण गये। इसी गृहयुद्ध में श्री रीयन, श्री पेड्डी, श्री
मेकडोनोह आदि कितने सुन्दर वीर रणचण्डी की सहचारियों डाकिनी पिशाचिनी
आदि को निज रक्त मांस से तृप्त करते हुए उसी युद्ध में संसार मंच से उठ गये।
वे आयरलैण्ड के वीर त्यागी, सच्चे और निस्स्वार्थ योद्धा थे। उन पर हमारा देश
जितना गर्व कर सके, थोड़ा है।
1923 के बसन्त में श्री लियमलिंच की मृत्यु हो जाने पर शार्टरफ़ोर्ड काउण्टी
में होने वाली सन्धि कॉन्फ्रेंस में सम्मिलित होने के विचार से हम अपने कई मित्रों
के साथ चल दिये। हम मैलेरी पहुँचे। वहाँ पर जब हम खेतों से निकलकर एक
सड़क पार कर रहे थे, तीनों ओर से गोलियों की वर्षा होने लगी। भागते-भागते
पहाड़ी पर चढ़ जाना पड़ा। दो दिनों तक पहाड़ियों पर ही रहना पड़ा क्योंकि फ़्रीस्टेट
की सेना उस ज़िले को नष्ट-भ्रष्ट करने के लिए वहाँ एक बड़ी तादाद में पड़ी
थी। बाद में किसी प्रकार अरहलो की घाटी में मेरे छिपने लायक एक स्थान मिल
गया। यद्यपि भूख और नींद बहुत सता रही थी, फिर भी उसमें छिपकर सो गया।
उठ कर सेनाओं के चलने का शब्द सुनकर खन्दक में से सिर निकालकर देखा
तो फ़्रीस्टेट के सैनिक बन्दूकें तानकर घेरे खड़े थे। कोई चारा न था। आत्मसमर्पण
कर दिया।
748 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़
मैं भीरू नहीं, कायर नहीं, निर्जीव नहीं, तथापि उस दिन न जाने क्यों
रह-रहकर रो उठने को जी चाहने लगता था। जी में आता था बिलख-बिलखकर
ख़ूब रो लूँ, सिसक-सिसक उठूँ, शायद हृदय का भार कुछ हलका हो जाये।
कितनी बार बड़ी मुश्किल से ही झरते हुए आँसुओं को रोक पाया था। उस दिन
मेरी विचित्र हालत थी। पाँच वर्ष तक मैं इंग्लैण्ड की सेनाओं को नष्ट-भ्रष्ट करता
रहा। अपने देश तथा देशवासियों के लिए अपनी खुशी से अनेक तकलीफ़ें सहीं,
पर वही मैं, आज अपने ही देश में अपने ही देशवासियों के द्वारा क़ैदकर लिया
गया था।
गैल वाली में मेरा अभियोग चला और सज़ा पाकर लिमरिक जेल में रखा गया।
वहाँ से माउण्ड ज्वाय जेल में भेज दिया गया। वहाँ के दुर्व्यवहार के कारण मैंने
अनशन कर दिया और 12 दिनों के अनशन के बाद छोड़ दिया गया।
मेरे इस जेल जीवन के दिनों में ही टिप्रेरी निवासी लोगों ने मुझे अपना सीनियर
रिपब्लिकन डिप्टी चुन लिया था।
ISBN 978-81-87728-95-5
ISBN 818772895-7
9788187 728955
राहुल
फ़ाउण्डेशन
मूल्य रु. 350
बेहतर ज़िन्दगी का रास्ता
बेहतर किताबों से होकर जाता है!
जनचेतना
सम्पूर्ण सूचीपत्र
2018
हम हैं सपनों के हरकारे
हम हैं विचारों के डाकिये
आम लोगों के लिए
ज़रूरी हैं वे किताबें
जो उनकी ज़िन्दगी की घुटन
और मुक्ति के स्वप्नों तक
पहुँचाती हैं विचार
जैसे कि बारूद की ढेरी तक
आग की चिनगारी।
घर-घर तक चिनगारी छिटकाने वाला
तेज़ हवा का झोंका बन जाना होगा
ज़िन्दगी और आने वाले दिनों का सच
बतलाने वाली किताबों को
जन-जन तक पहुँचाना होगा।
दो दशक पहले प्रगतिशील, जनपक्षधर साहित्य को जन-जन तक पहुँचाने की
मुहिम की एक छोटी-सी शुरुआत हुई, बड़े मंसूबे के साथ। एक छोटी-सी दुकान
और फुटपाथों पर, मुहल्लों में और दफ़्तरों के सामने छोटी-छोटी प्रदर्शनियाँ लगाने
वाले तथा साइकिलों पर, ठेलों पर, झोलों में भरकर घर-घर किताबें पहुँचाने वाले
समर्पित अवैतनिक वालण्टियरों की टीम – शुरुआत बस यहीं से हुई। आज यह
वैचारिक अभियान उत्तर भारत के दर्जनों शहरों और गाँवों तक फैल चुका है। एक
बड़े और एक छोटे प्रदर्शनी वाहन के माध्यम से जनचेतना हिन्दी और पंजाबी क्षेत्र
के सुदूर कोनों तक हिन्दी, पंजाबी और अंग्रेज़ी साहित्य एवं कला-सामग्री के साथ
सपने और विचार लेकर जा रही है, जीवन-संघर्ष-सृजन-प्रगति का नारा लेकर जा
रही है।
हिन्दी क्षेत्र में यह अपने ढंग का एक अनूठा प्रयास है। एक भी वैतनिक स्टाफ़
के बिना, समर्पित वालण्टियरों और विभिन्न सहयोगी जनसंगठनों के कार्यकर्ताओं
के बूते पर यह प्रोजेक्ट आगे बढ़ रहा है।
आइये, आप सभी इस मुहिम में हमारे सहयात्री बनिये।
सम्पूर्ण सूचीपत्र
परिकल्पना प्रकाशन
उपन्यास
- तरुणाई का तराना/याङ मो ...
- तीन टके का उपन्यास/बेर्टोल्ट ब्रेष्ट ...
- माँ/मक्सिम गोर्की ...
- वे तीन/मक्सिम गोर्की 75.00
- मेरा बचपन/मक्सिम गोर्की ...
- जीवन की राहों पर/मक्सिम गोर्की ...
- मेरे विश्वविद्यालय/मक्सिम गोर्की ...
- फ़ोमा गोर्देयेव/मक्सिम गोर्की 55.00
- अभागा/मक्सिम गोर्की 40.00
- बेकरी का मालिक/मक्सिम गोर्की 25.00
- असली इन्सान/बोरिस पोलेवोई ...
- तरुण गार्ड/अलेक्सान्द्र फ़देयेव (दो खण्डों में) 160.00
- गोदान/प्रेमचन्द ...
- निर्मला/प्रेमचन्द ...
- पथ के दावेदार/शरत्चन्द्र ...
- चरित्रहीन/शरत्चन्द्र ...
- गृहदाह/शरत्चन्द्र 70.00
- शेषप्रश्न/शरत्चन्द्र ...
- इन्द्रधनुष/वान्दा वैसील्युस्का 65.00
- इकतालीसवाँ/बोरीस लब्रेन्योव 20.00
- दास्तान चलती है (एक नौजवान की
डायरी से)/अनातोली कुज़्नेत्सोव 70.00
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- वे सदा युवा रहेंगे/ग्रीगोरी बकलानोव 60.00
- मुर्दों को क्या लाज-शर्म/ग्रीगोरी बकलानोव 40.00
- बख़्तरबन्द रेल 14-69/व्सेवोलोद इवानोव 30.00
- अश्वसेना/इसाक बाबेल 40.00
- लाल झण्डे के नीचे/लाओ श 50.00
- रिक्शावाला/लाओ श 65.00
- चिरस्मरणीय (प्रसिद्ध कन्नड़ उपन्यास)/निरंजन 55.00
- एक तयशुदा मौत (एनजीओ की पृष्ठभूमि पर)/मोहित राय 30.00
- Mother/Maxim Gorky 250.00
- The Song of Youth/Yang Mo ...
कहानियाँ - श्रेष्ठ सोवियत कहानियाँ (3 खण्डों का सेट) 450.00
- वह शख़्स जिसने हैडलेबर्ग को भ्रष्ट कर दिया
(मार्क ट्वेन की दो कहानियाँ) 60.00
मक्सिम गोर्की - चुनी हुई कहानियाँ (खण्ड 1) ...
- चुनी हुई कहानियाँ (खण्ड 2) ...
- चुनी हुई कहानियाँ (खण्ड 3) ...
- हिम्मत न हारना मेरे बच्चो 10.00
- कामो : एक जाँबाज़ इन्क़लाबी मज़दूर की कहानी ...
अन्तोन चेख़व - चुनी हुई कहानियाँ (खण्ड 1) ...
- चुनी हुई कहानियाँ (खण्ड 2) ...
- दो अमर कहानियाँ/लू शून ...
- श्रेष्ठ कहानियाँ/प्रेमचन्द 80.00
- पाँच कहानियाँ/पुश्किन ...
- तीन कहानियाँ/गोगोल 30.00
- तूफ़ान/अलेक्सान्द्र सेराफ़ीमोविच 60.00
- वसन्त/सेर्गेई अन्तोनोव 60.00
- वसन्तागम/रओ शि 50.00
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- सूरज का खज़ाना/मिखाईल प्रीश्विन 40.00
- स्नेगोवेत्स का होटल/मत्वेई तेवेल्योव 35.00
- वसन्त के रेशम के कीड़े/माओ तुन 50.00
- क्रान्ति झंझा की अनुगूँजें (अक्टूबर क्रान्ति की कहानियाँ) 75.00
- चुनी हुई कहानियाँ/श्याओ हुङ 50.00
- समय के पंख/कोन्स्तान्तीन पाउस्तोव्स्की ...
- श्रेष्ठ रूसी कहानियाँ (संकलन) ...
- अनजान फूल/आन्द्रेई प्लातोनोव 40.00
- कुत्ते का दिल/मिख़ाईल बुल्गाकोव 70.00
- दोन की कहानियाँ/मिख़ाईल शोलोख़ोव 35.00
- अब इन्साफ़ होने वाला है ...
(भारत और पाकिस्तान की प्रगतिशील उर्दू कहानियों का प्रतिनिधि संकलन)
(ग्यारह नयी कहानियों सहित परिवर्द्धित संस्करण)/स. शकील सिद्दीक़ी - लाल कुरता/हरिशंकर श्रीवास्तव ...
- चम्पा और अन्य कहानियाँ/मदन मोहन 35.00
कविताएँ - जब मैं जड़ों के बीच रहता हूँ/पाब्लो नेरूदा 60.00
- आँखें दुनिया की तरफ़ देखती हैं/लैंग्सटन ह्यूज 60.00
- उम्मीद-ए-सहर की बात सुनो (फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के संस्मरण और
चुनिन्दा शायरी, सम्पादकः शकील सिद्दीक़ी) 160.00 - माओ त्से-तुङ की कविताएँ (राजनीतिक पृष्ठभूमि सहित विस्तृत
टिप्पणियाँ एवं अनुवाद : सत्यव्रत) 20.00 - इकहत्तर कविताएँ और तीस छोटी कहानियाँ - बेर्टोल्ट ब्रेष्ट
(मूल जर्मन से अनुवाद : मोहन थपलियाल)
(ब्रेष्ट के दुर्लभ चित्रों और स्केचों से सज्जित) 150.00 - समर तो शेष है... (इप्टा के दौर से आज तक के
प्रतिनिधि क्रान्तिकारी समूहगीतों का संकलन) 65.00 - मध्यवर्ग का शोकगीत/हान्स मान्नुस एन्तसेन्सबर्गर 30.00
- जेल डायरी/हो ची मिन्ह 40.00
- ओस की बूँदें और लाल गुलाब/होसे मारिया सिसों 25.00
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- इन्तिफ़ादा : फ़लस्तीनी कविताएँ/स. रामकृष्ण पाण्डेय ...
- लहू है कि तब भी गाता है/पाश ...
- लोहू और इस्पात से फूटता गुलाब : फ़लस्तीनी कविताएँ (द्विभाषी संकलन)
A Rose Breaking Out of Steel and Blood (Palestinian Poems) 60.00 - पाठान्तर/विष्णु खरे 50.00
- लालटेन जलाना (चुनी हुई कविताएँ)/विष्णु खरे 60.00
- ईश्वर को मोक्ष/नीलाभ 60.00
- बहनें और अन्य कविताएँ/असद ज़ैदी 50.00
- सामान की तलाश/असद ज़ैदी 50.00
- कोहेकाफ़ पर संगीत-साधना/शशिप्रकाश 50.00
- पतझड़ का स्थापत्य/शशिप्रकाश 75.00
- सात भाइयों के बीच चम्पा/कात्यायनी (पेपरबैक) ...
(हार्डबाउंड) 125.00 - इस पौरुषपूर्ण समय में/कात्यायनी 60.00
- जादू नहीं कविता/कात्यायनी (पेपरबैक) ...
(हार्डबाउंड) 200.00 - फुटपाथ पर कुर्सी/कात्यायनी 80.00
- राख-अँधेरे की बारिश में/कात्यायनी 15.00
- यह मुखौटा किसका है/विमल कुमार 50.00
- यह जो वक्त है/कपिलेश भोज 60.00
- देश एक राग है/भगवत रावत ...
- बहुत नर्म चादर थी जल से बुनी/नरेश चन्द्रकर 60.00
- दिन भौंहें चढ़ाता है/मलय 120.00
- देखते न देखते/मलय 65.00
- असम्भव की आँच/मलय 100.00
- इच्छा की दूब/मलय 90.00
- इस ढलान पर/प्रमोद कुमार 90.00
- तो/शैलेय 75.00
नाटक - करवट/मक्सिम गोर्की 40.00
- दुश्मन/मक्सिम गोर्की 35.00
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- तलछट/मक्सिम गोर्की ...
- तीन बहनें (दो नाटक)/अन्तोन चेख़व 45.00
- चेरी की बग़िया (दो नाटक)/अ. चेख़व 45.00
- बलिदान जो व्यर्थ न गया/व्सेवोलोद विश्नेव्स्की 30.00
- क्रेमलिन की घण्टियाँ/निकोलाई पोगोदिन 30.00
संस्मरण - लेव तोल्स्तोय : शब्द-चित्र/मक्सिम गोर्की 20.00
स्त्री-विमर्श - दुर्ग द्वार पर दस्तक (स्त्री प्रश्न पर लेख)/कात्यायनी (पेपरबैक) 130.00
ज्वलन्त प्रश्न - कुछ जीवन्त कुछ ज्वलन्त/कात्यायनी 90.00
- षड्यन्त्ररत मृतात्माओं के बीच
(साम्प्रदायिकता पर लेख)/कात्यायनी 25.00 - इस रात्रि श्यामला बेला में (लेख और टिप्पणियाँ)/सत्यव्रत 30.00
व्यंग्य - कहें मनबहकी खरी-खरी/मनबहकी लाल 25.00
नौजवानों के लिए विशेष - जय जीवन! (लेख, भाषण और पत्र)/निकोलाई ओस्त्रोव्स्की 50.00
वैचारिकी - माओवादी अर्थशास्त्र और समाजवाद का भविष्य/रेमण्ड लोट्टा 25.00
साहित्य-विमर्श - उपन्यास और जनसमुदाय/रैल्फ़ फ़ॉक्स 75.00
- लेखनकला और रचनाकौशल/
गोर्की, फ़ेदिन, मयाकोव्स्की, अ. तोल्सतोय ... - दर्शन, साहित्य और आलोचना/
बेलिंस्की, हर्ज़न, चेर्नीशेव्स्की, दोब्रोल्युबोव 65.00 - सृजन-प्रक्रिया और शिल्प के बारे में/मक्सिम गोर्की 40.00
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- मार्क्सवाद और भाषाविज्ञान की समस्याएँ/स्तालिन 20.00
नयी पीढ़ी के निर्माण के लिए - एक पुस्तक माता-पिता के लिए/अन्तोन मकारेंको ...
- मेरा हृदय बच्चों के लिए/वसीली सुख़ोम्लीन्स्की ...
आह्वान पुस्तिका श्रृंखला - प्रेम, परम्परा और विद्रोह/कात्यायनी 50.00
सृजन परिप्रेक्ष्य पुस्तिका श्रृंखला - एक नये सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के
वैचारिक-सांस्कृतिक कार्यभार/कात्यायनी, सत्यम 25.00
दो महत्वपूर्ण पत्रिकाएँ
दिशा सन्धान
मार्क्सवादी सैद्धान्तिक शोध और विमर्श का मंच
सम्पादकः कात्यायनी / सत्यम
एक प्रति : 100 रुपये, आजीवनः 5000 रुपये
वार्षिक ( 4 अंक ) : 400 रुपये ( 100 रु. रजि. बुकपोस्ट व्यय अतिरिक्त )
नान्दीपाठ
मीडिया, संस्कृति और समाज पर केन्द्रित
सम्पादकः कात्यायनी / सत्यम
एक प्रति : 40 रुपये आजीवनः 3000 रुपये
वार्षिक ( 4 अंक ) : 160 रुपये ( 100 रु. रजि. बुक पोस्ट व्यय अतिरिक्त )
सम्पादकीय कार्यालय :
69 ए-1, बाबा का पुरवा, पेपर मिल रोड, निशातगंज, लखनऊ-226006
फोन: 9936650658, 8853093555
वेबसाइट : http://dishasandhaan.in ईमेल: [email protected]
वेबसाइट : http://naandipath.in ईमेल: [email protected]
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राहुल फाउण्डेशन
नौजवानों के लिए विशेष
- नौजवानों से दो बातें/पीटर क्रोपोटकिन 15.00
- क्रान्तिकारी कार्यक्रम का मसविदा/भगतसिंह 15.00
- मैं नास्तिक क्यों हूँ और ‘ड्रीमलैण्ड’ की भूमिका/भगतसिंह 15.00
- बम का दर्शन और अदालत में बयान/भगतसिंह 15.00
- जाति-धर्म के झगड़े छोड़ो, सही लड़ाई से नाता जोड़ो/भगतसिंह 15.00
- भगतसिंह ने कहा...(चुने हुए उद्धरण)/भगतसिंह 15.00
क्रान्तिकारियों के दस्तावेज़
- भगतसिंह और उनके साथियों के
सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़/स. सत्यम 350.00 - शहीदेआज़म की जेल नोटबुक/भगतसिंह 100.00
- विचारों की सान पर/भगतसिंह 50.00
क्रान्तिकारियों के विचारों और जीवन पर
- बहरों को सुनाने के लिए/एस. इरफ़ान हबीब
(भगतसिंह और उनके साथियों की विचारधारा और कार्यक्रम) ... - क्रान्तिकारी आन्दोलन का वैचारिक विकास/शिव वर्मा 15.00
- भगतसिंह और उनके साथियों की
विचारधारा और राजनीति/बिपन चन्द्र 20.00 - यश की धरोहर/
भगवानदास माहौर, शिव वर्मा, सदाशिवराव मलकापुरकर 50.00 - संस्मृतियाँ/शिव वर्मा 80.00
- शहीद सुखदेव : नौघरा से फाँसी तक/स. डॉ. हरदीप सिंह 40.00
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महत्त्वपूर्ण और विचारोत्तेजक संकलन
- उम्मीद एक ज़िन्दा शब्द है
('दायित्वबोध' के महत्त्वपूर्ण सम्पादकीय लेखों का संकलन) 75.00 - एनजीओ : एक ख़तरनाक साम्राज्यवादी कुचक्र 60.00
- डब्ल्यूएसएफ़ : साम्राज्यवाद का नया ट्रोजन हॉर्स 50.00
ज्वलन्त प्रश्न - 'जाति' प्रश्न के समाधान के लिए बुद्ध काफ़ी नहीं, अम्बेडकर भी
काफ़ी नहीं, मार्क्स ज़रूरी हैं / रंगनायकम्मा ... - जाति और वर्ग : एक मार्क्सवादी दृष्टिकोण / रंगनायकम्मा 60.00
दायित्वबोध पुस्तिका श्रृंखला - अनश्वर हैं सर्वहारा संघर्षों की अग्निशिखाएँ/दीपायन बोस 10.00
- समाजवाद की समस्याएँ, पूँजीवादी पुनर्स्थापना और महान सर्वहारा
सांस्कृतिक क्रान्ति/शशिप्रकाश 30.00 - क्यों माओवाद?/शशिप्रकाश 20.00
- बुर्जुआ वर्ग के ऊपर सर्वतोमुखी अधिनायकत्व
लागू करने के बारे में/चाङ चुन-चियाओ 5.00 - भारतीय कृषि में पूँजीवादी विकास/सुखविन्दर 35.00
आह्वान पुस्तिका श्रृंखला - छात्र-नौजवान नयी शुरुआत कहाँ से करें? 15.00
- आरक्षण : पक्ष, विपक्ष और तीसरा पक्ष 15.00
- आतंकवाद के बारे में : विभ्रम और यथार्थ 15.00
- क्रान्तिकारी छात्र-युवा आन्दोलन 15.00
- भ्रष्टाचार और उसके समाधान का सवाल
सोचने के लिए कुछ मुद्दे 50.00
बिगुल पुस्तिका श्रृंखला - कम्युनिस्ट पार्टी का संगठन और उसका ढाँचा/लेनिन 10.00
- मकड़ा और मक्खी/विल्हेल्म लीब्नेख़्त 5.00
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- ट्रेडयूनियन काम के जनवादी तरीक़े/सेर्गेई रोस्तोवस्की 5.00
- मई दिवस का इतिहास/अलेक्ज़ैण्डर ट्रैक्टनबर्ग 10.00
- पेरिस कम्यून की अमर कहानी 20.00
- अक्टूबर क्रान्ति की मशाल 15.00
- जंगलनामा : एक राजनीतिक समीक्षा/डॉ. दर्शन खेड़ी 5.00
- लाभकारी मूल्य, लागत मूल्य, मध्यम किसान और छोटे पैमाने
के माल उत्पादन के बारे में मार्क्सवादी दृष्टिकोण : एक बहस 30.00 - संशोधनवाद के बारे में 10.00
- शिकागो के शहीद मज़दूर नेताओं की कहानी/हावर्ड फ़ास्ट 10.00
- मज़दूर आन्दोलन में नयी शुरुआत के लिए 20.00
- मज़दूर नायक, क्रान्तिकारी योद्धा 15.00
- चोर, भ्रष्ट और विलासी नेताशाही ...
- बोलते आँकड़े, चीखती सच्चाइयाँ ...
- राजधानी के मेहनतकश : एक अध्ययन/अभिनव 30.00
- फ़ासीवाद क्या है और इससे कैसे लड़ें?/अभिनव 75.00
- नेपाली क्रान्ति : इतिहास, वर्तमान परिस्थिति और आगे के रास्ते
से जुड़ी कुछ बातें, कुछ विचार/आलोक रंजन 55.00 - कैसा है यह लोकतंत्र और यह संविधान किनकी सेवा करता है
आलोक रंजन/आनन्द सिंह 100.00
मार्क्सवाद - धर्म के बारे में/मार्क्स, एंगेल्स 100.00
- कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र/मार्क्स-एंगेल्स 25.00
- साहित्य और कला/मार्क्स-एंगेल्स 150.00
- फ़्रांस में वर्ग-संघर्ष/कार्ल मार्क्स 40.00
- फ़्रांस में गृहयुद्ध/कार्ल मार्क्स 20.00
- लूई बोनापार्त की अठारहवीं ब्रूमेर/कार्ल मार्क्स 35.00
- उज़रती श्रम और पूँजी/कार्ल मार्क्स 15.00
- मज़दूरी, दाम और मुनाफ़ा/कार्ल मार्क्स 20.00
- गोथा कार्यक्रम की आलोचना/कार्ल मार्क्स 40.00
- लुडविग फ़ायरबाख़ और क्लासिकीय जर्मन दर्शन का अन्त/
फ़्रेडरिक एंगेल्स 20.00
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- जर्मनी में क्रान्ति तथा प्रतिक्रान्ति/फ्रेडरिक एंगेल्स 30.00
- समाजवाद : काल्पनिक तथा वैज्ञानिक/फ़्रेडरिक एंगेल्स ...
- पार्टी कार्य के बारे में/लेनिन 15.00
- एक क़दम आगे, दो क़दम पीछे/लेनिन 60.00
- जनवादी क्रान्ति में सामाजिक-जनवाद के दो रणकौशल/लेनिन 25.00
- समाजवाद और युद्ध/लेनिन 20.00
- साम्राज्यवाद : पूँजीवाद की चरम अवस्था/लेनिन 30.00
- राज्य और क्रान्ति/लेनिन 40.00
- सर्वहारा क्रान्ति और गद्दार काउत्स्की/लेनिन 15.00
- दूसरे इण्टरनेशनल का पतन/लेनिन 15.00
- गाँव के ग़रीबों से/लेनिन ...
- मार्क्सवाद का विकृत रूप तथा साम्राज्यवादी अर्थवाद/लेनिन 20.00
- कार्ल मार्क्स और उनकी शिक्षा/लेनिन 20.00
- क्या करें?/लेनिन ...
- “वामपन्थी” कम्युनिज़्म - एक बचकाना मर्ज़/लेनिन ...
- पार्टी साहित्य और पार्टी संगठन/लेनिन 15.00
- जनता के बीच पार्टी का काम/लेनिन 70.00
- धर्म के बारे में/लेनिन 20.00
- तोल्सतोय के बारे में/लेनिन 10.00
- मार्क्सवाद की मूल समस्याएँ/जी. प्लेख़ानोव 30.00
- जुझारू भौतिकवाद/प्लेख़ानोव 35.00
- लेनिनवाद के मूल सिद्धान्त/स्तालिन 50.00
- सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी ( बोल्शेविक ) का इतिहास 90.00
- माओ त्से-तुङ की रचनाएँ : प्रतिनिधि चयन (एक खण्ड में) ...
- कम्युनिस्ट जीवनशैली और कार्यशैली के बारे में/माओ त्से-तुङ ...
- सोवियत अर्थशास्त्र की आलोचना/माओ त्से-तुङ 35.00
- दर्शन विषयक पाँच निबन्ध/माओ त्से-तुङ 70.00
- कला-साहित्य विषयक एक भाषण और पाँच दस्तावेज़ /
माओ त्से-तुङ 15.00 - माओ त्से-तुङ की रचनाओं के उद्धरण 50.00
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अन्य मार्क्सवादी साहित्य
- राजनीतिक अर्थशास्त्र, मार्क्सवादी अध्ययन पाठ्यक्रम [नयी] 300.00
- खुशचेव झूठा था/ग्रोवर फ़र 300.00
- राजनीतिक अर्थशास्त्र के मूलभूत सिद्धान्त (दो खण्डों में)
(दि शंघाई टेक्स्टबुक ऑफ़ पोलिटिकल इकोनॅामी) 160.00 - पेरिस कम्यून की शिक्षाएँ (सचित्र) एलेक्ज़ेण्डर ट्रैक्टनबर्ग 10.00
- कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र/डी. रियाज़ानोव 100.00
(विस्तृत व्याख्यात्मक टिप्पणियों सहित) - द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद/डेविड गेस्ट ...
- महान सर्वहारा सांस्कृतिक क्रान्ति : चुने हुए दस्तावेज़
और लेख (खण्ड 1) 35.00 - इतिहास ने जब करवट बदली/विलियम हिण्टन 25.00
- द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद/वी. अदोरात्स्की 50.00
- अक्टूबर क्रान्ति और लेनिन/अल्बर्ट रीस विलियम्स 90.00
(महत्त्वपूर्ण नयी सामग्री और अनेक नये दुर्लभ चित्रों से सज्जित परिवर्द्धित संस्करण) - सोवियत संघ में पूँजीवाद की पुनर्स्थापना/मार्टिन निकोलस 50.00
राहुल साहित्य - तुम्हारी क्षय/राहुल सांकृत्यायन 40.00
- दिमाग़ी ग़ुलामी/राहुल सांकृत्यायन ...
- वैज्ञानिक भौतिकवाद/राहुल सांकृत्यायन 65.00
- राहुल निबन्धावली/राहुल सांकृत्यायन 50.00
- स्तालिन : एक जीवनी/राहुल सांकृत्यायन 150.00
परम्परा का स्मरण - चुनी हुई रचनाएँ/गणेशशंकर विद्यार्थी 100.00
- सलाखों के पीछे से/गणेशशंकर विद्यार्थी 30.00
- ईश्वर का बहिष्कार/राधामोहन गोकुलजी 30.00
- लौकिक मार्ग/राधामोहन गोकुलजी 20.00
- धर्म का ढकोसला/राधामोहन गोकुलजी 30.00
- स्त्रियों की स्वाधीनता/राधामोहन गोकुलजी 30.00
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जीवनी और संस्मरण
- कार्ल मार्क्स जीवन और शिक्षाएँ/ज़ेल्डा कोट्स 25.00
- फ़्रेडरिक एंगेल्स : जीवन और शिक्षाएँ/ज़ेल्डा कोट्स ...
- कार्ल मार्क्स : संस्मरण और लेख ...
- अदम्य बोल्शेविक नताशा
(एक स्त्री मज़दूर संगठनकर्ता की संक्षिप्त जीवनी)/एल. काताशेवा 30.00 - लेनिन कथा/मरीया प्रिलेज़ायेवा 70.00
- लेनिन विषयक कहानियाँ 75.00
- लेनिन के जीवन के चन्द पन्ने/लीदिया फ़ोतियेवा ...
- स्तालिन : एक जीवनी/राहुल सांकृत्यायन 150.00
विविध - फाँसी के तख़्ते से/जूलियस फ़्यूचिक 30.00
- पाप और विज्ञान/डायसन कार्टर 100.00
- सापेक्षिकता सिद्धान्त क्या है?/लेव लन्डाऊ, यूरी रूमेर ....
मुक्तिकामी छात्रों-युवाओं का
आह्वान
सम्पादकीय कार्यालय
बी-100, मुकुन्द विहार, करावल नगर,
दिल्ली-110094
एक प्रति : 20 रुपये • वार्षिक : 160 रुपये (डाकव्यय सहित)
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Rahul Foundation
MARXIST CLASSICS
KARL MARX
- A Contribution to the Critique of Political Economy 100.00
- The Civil War in France 80.00
- The Eighteenth Brumaire of Louis Bonaparte 40.00
- Critique of the Gotha Programme 25.00
- Preface and Introduction to
A Contribution to the Critique of Political Economy 25.00 - The Poverty of Philosophy 80.00
- Wages, Price and Profit 35.00
- Class Struggles in France 50.00
FREDERICK ENGELS - The Peasant War in Germany 70.00
- Ludwig Feuerbach and the End of
Classical German Philosophy 65.00 - On Capital 55.00
- The Origin of the Family, Private Property
and the State 100.00 - Socialism: Utopian and Scientific 60.00
- On Marx 20.00
- Principles of Communism 5.00
MARX and ENGELS - Historical Writings (Set of 2 Vols.) 700.00
- Manifesto of the Communist Party 50.00
- Selected Letters 40.00
V. I. LENIN - Theory of Agrarian Question 160.00
- The Collapse of the Second International 25.00
- Imperialism, the Highest Stage of Capitalism 80.00
- Materialism and Empirio-Criticism 150.00
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