भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 755, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंमैं भीरू नहीं, कायर नहीं, निर्जीव नहीं, तथापि उस दिन न जाने क्यों
रह-रहकर रो उठने को जी चाहने लगता था। जी में आता था बिलख-बिलखकर
ख़ूब रो लूँ, सिसक-सिसक उठूँ, शायद हृदय का भार कुछ हलका हो जाये।
कितनी बार बड़ी मुश्किल से ही झरते हुए आँसुओं को रोक पाया था। उस दिन
मेरी विचित्र हालत थी। पाँच वर्ष तक मैं इंग्लैण्ड की सेनाओं को नष्ट-भ्रष्ट करता
रहा। अपने देश तथा देशवासियों के लिए अपनी खुशी से अनेक तकलीफ़ें सहीं,
पर वही मैं, आज अपने ही देश में अपने ही देशवासियों के द्वारा क़ैदकर लिया
गया था।
गैल वाली में मेरा अभियोग चला और सज़ा पाकर लिमरिक जेल में रखा गया।
वहाँ से माउण्ड ज्वाय जेल में भेज दिया गया। वहाँ के दुर्व्यवहार के कारण मैंने
अनशन कर दिया और 12 दिनों के अनशन के बाद छोड़ दिया गया।
मेरे इस जेल जीवन के दिनों में ही टिप्रेरी निवासी लोगों ने मुझे अपना सीनियर
रिपब्लिकन डिप्टी चुन लिया था।