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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 726, कुल 788 में से

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पृष्ठ 726

में सार्जेण्ट वालीस की तरह तत्परता होती तो हममें कोई भी न बच पाता। परन्तु
उसकी सुस्ती से मुझे अपना रिवाल्वर उठाकर बायें हाथ से उसे चलाने का अवसर
मिल ही गया। वह भाग गया। वालीस भी लगभग मर चुका था। रेली ही एक ऐसा
था जोकि घटना का पूरा-पूरा वर्णन कर सकता था। परन्तु जूरी के जजों ने तो उसे
साफ़ कह दिया, “जरा सच सच कह सुनाओ, लीपा पोती मत करो।” उन्होंने यह
भी फ़ैसला दिया कि इस घटना का उत्तरदायित्व पुलिस पर है, क्योंकि माननीय
लोगों को धर पकड़ने का ही यही परिणाम है।
मैं वहाँ से बाहर निकला तो ख़ून बह जाने के कारण अपने को दुर्बल पाया।
बाहर एक मोटर खड़ी थी, शायद किसी की प्रतीक्षा कर रही थी। मैंने झट रिवाल्वर
तानकर ड्राइवर से मोटर छीन ली। परन्तु उसका उपयोग करने की सुधि न रही।
बाहर हागन की बेड़ियाँ काट दी गईं और स्वेच्छा सेवकों ने उसकी रक्षा का भार
ले लिया। हम चारों घायल व्यक्ति अँधेरे में भूलते भटकते, गिरते पड़ते शानहन की
ओर चल दिये। वहाँ पहुँचने पर मुझे बिस्तर पर लिटा दिया गया। डॉक्टर और पादरी
बुला लिए गये। बाहर क्लेमेंसी नामक एक नवयुवक की अध्यक्षता में पहरा खड़ा
कर दिया गया। डॉक्टर ने कह दिया, “बस। सब खेल 24 घण्टे में समाप्त हो
जायेगा।” मैं एकदम अधीर हो उठा। यह मेरे लिए असह्य था। परन्तु हमारे लिए
अन्तिम 24 घण्टों में भी तो शान्ति न बदी थी। चारों ओर पुलिस ही पुलिस दीखने
लगी। क़ब्रिस्तान तक में नई क़ब्रें ढूँढ़ी गईं, क्योंकि पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार
दो आक्रमणकारी लगभग मर गये थे।
आगे चलने से पहले यदि दो बातें और कह दूँ तो अनुचित न होगा। जिस
समय स्टेशन पर हम लोग लड़ रहे थे, उसी समय दूसरे प्लेटफार्म पर एक और
गाड़ी खड़ी हुई थी जिसमें बहुत से सैनिक आ रहे थे। उन लोगों ने हस्तक्षेप क्यों
न किया, यह हमारी समझ में न आया। उसी समय दो मील की दूरी पर एल्टेन
के सिपाहियों ने गोली की आवाज़ सुनी। वे भागकर बैरकों में घुस गये तथा
अन्दर से साँकल लगाकर बैठ गये। काउण्टी इंस्पेक्टर मिस्टर ईगन ने तो भी द्वार
न खोला। मोटर से दरवाज़ा तोड़कर वे भीतर घुस गये और “बुज़दिलो! कायरो!
तुम यहाँ छिपे पड़े हो, तुम्हारे चार साथी मारे गये हैं, हत्यारे भाग गये हैं और तुम
अभी तक यहीं पड़े हो, तुम्हें लज्जा नहीं आती,” आदि आदि कहकर उनसे
साँकल खुला पाये।
यहाँ श्री हागन की कथा लिख दें तो अनुचित न होगा। नृत्य के बाद वे आना
फ़ील्ड निवासी मोघर परिवार के मकान पर चले गये। भोजन करते करते मेज़ पर
ही सो गये। फिर बिस्तर पर सुलाये गये। अभी लेटे ही थे कि ‘पुलिस आ गयी,
पुलिस आ गयी’ के शब्दों से उन्हें जगा दिया गया। वे यह समझे कि सैनिक इधर
से आ रहे होंगे, दक्षिण की ओर भागे। कुछ दूर जाकर उन्होंने अपना रिवाल्वर बन्द
720 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़