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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 725, कुल 788 में से

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पृष्ठ 725

कम चार सशस्त्र सैनिक होंगे। परन्तु करते ही क्या? ट्रेन आ गयी। हम प्लेटफार्म
पर घुस ही तो गये। भागते समय एक मोटी-सी वृद्ध स्त्री से टक्कर लग गयी।
मैंने उसके गिर्द बाँहें डाल दीं और दोनों घूमते-घूमते पृथ्वी पर गिर पड़े।
क्षमायाचना का तो अवसर था ही नहीं, उठकर फिर भागे। परन्तु बन्दी इस गाड़ी
में नहीं आया था। दूसरी गाड़ी सायंकाल सात बजे आने वाली थी। हमने गाल्टी
बटालियन के कुछ स्वेच्छा सेवक बुला भेजे। पाँच स्वेच्छा सेवक पाँच बजे आ
पहुँचे। वे बड़े वीर तथा निर्भीक सैनिक थे। हम एक साथी को इमली स्टेशन पर
छोड़कर स्वयं सभी साथी नाकलांग (Knocklong) स्टेशन पर चले गये। इमली
स्टेशन स्थित स्वेच्छा सेवक का कर्तव्य बन्दी वाली गाड़ी के साथ सतर्कता से
चढ़कर हमें उस गाड़ी की ओर संकेत करना था।
मदमत्त इंजन धक-धक करता हुआ प्लेटफार्म पर आ पहुँचा। स्वेच्छा सेवक
के संकेत से हम सीधे बन्दी की गाड़ी में जा पहुँचे। ट्रेन केवल दो मिनट ही
ठहरेगी, यह हमें खूब मालूम था। बन्दी को एक लम्बी गाड़ी के छोटे से खाने में
चार सशस्त्र सिपाही घेरे बैठे थे। सभी डिब्बे एक छोटे संकुचित मार्ग द्वारा एक
दूसरे से मिले हुए थे। आक्रमण का नेतृत्व श्री ट्रीसी को सौंपा गया था। गाड़ी में
घुसते ही ‘हाथ उठा दो’ की सैनिक आज्ञा दे दी गयी...अभी कुछ ही क्षण पहले
सिपाहियों के अध्यक्ष सार्जेण्ट वालीस ने बेचारे हागन को बन्दूक से ठेलते हुए
बड़े व्यंग्यपूर्ण स्वर में पूछा था, “क्यों जी, तुम्हारे डेनब्रीन और ट्रीसी किधर
ठोकरें खा रहे हैं?” इसका उत्तर, क्रियात्मक उत्तर, जिसकी कि उन्होंने कभी भी
आशा न की होगी, उन्हें मिल गया। दोनों रिवाल्वर ताने उसके सामने खड़े थे।
कांस्टेबल स्नराईट तत्क्षण रिवाल्वर तानकर बन्दी पर गोली चलाने ही वाला था
कि हमारी गोली ने उसे ठण्डा कर दिया। उन्हें यह आज्ञा दी गयी थी कि यदि
बन्दी को छुड़ाने का कोई प्रयत्न किया जाये तो उसे तुरन्त गोली से मार दिया
जाये। गोलियाँ चलीं। ठीक उसी समय प्लेटफार्म पर खाकी वर्दी पहने एक अंग्रेज़
सैनिक ने – जिसके हृदय में आयरिश खून दौड़ रहा था – बहुत आनन्द और
चाव से चिल्लाकर, ‘प्रजातन्त्र की जय’ कहा!
स्नराईट मर गया था। दूसरा घायल होकर गाड़ी से कूद गया। शेष सार्जेण्ट
वालीस और कांस्टेबल रेली बचे। दोनों के साथ खूब लड़ाई हुई। वालीस एक वीर
सैनिक थे, शत्रु दल में हमें वैसे साहसी बहुत कम दीख पड़े। हमारे सभी साथियों
के रिवाल्वर भी कहीं गुम हो गये। खैर, लड़ते-झगड़ते बन्दी हागन को, जो बेड़ियों
और हथकड़ियों से जकड़ा हुआ था, लेकर हम बाहर निकल पड़े। मैं बुरी तरह
घायल हो चुका था। कब और कैसे घायल हुआ, इसका कुछ पता नहीं। ट्रीसी,
राबिन्सन और ओब्रीन भी घायल हो चुके थे। रेली अब भी रायफ़ल से गोली चला
रहा था। एक गोली मेरे दाहिने हाथ में आ लगी। मेरा रिवाल्वर गिर गया। यदि रेली
आयरिश स्वतन्त्रता-संग्राम / 719