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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 716, कुल 788 में से

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पृष्ठ 716

ही हमारी संख्या बढ़ने लगेगी और कार्य होते देख युवक हमारे आसपास आ एकत्र
होंगे। गनीमी युद्ध (Guerilla Warfare) में संख्या के बजाय दृढ़ता तथा गुणों का
आधिक्य आवश्यक तथा लाभकारी होता है। प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। सबने मिलकर
यही निश्चय किया कि उस दिन पहरेदार सिपाहियों को निशस्त्र कर विस्फोटक
पदार्थ छीन लिए जायें। घात का स्थान भी निश्चित कर लिया गया। सोलोहैडबेग,
टिप्रेरी नगर से लगभग 2) मील की दूरी पर है। लिम्मर्क जंक्शन वहाँ से एक मील
के लगभग होगा। उसे चारों ओर से कुटिया, बाड़े आदि घेरे हुए थे, परन्तु डोबोहिल
के अतिरिक्त और कोई गाँव निकट नहीं था, और वह भी 1) मील की दूरी पर
था। खान की ओर जाने वाली सड़क के दोनों ओर खाइयाँ थीं और उनमें झाड़ियाँ
उग रही थीं। दुर्भाग्यवश हमें निश्चित तिथि का पता न लग सका। हम समझते थे
कि विस्फोटक की गाड़ी 16 जनवरी को आयेगी परन्तु वह 21 जनवरी तक न
आ पाई। हम पाँचों दिन बिल्कुल तैयार घात के स्थान पर बैठे रहते और दो-दो बजे
तक प्रतीक्षा करके उठ जाते। तीन दिनों के बाद आठ के अतिरिक्त सभी साथियों
को घर लौटा दिया। बाक़ी हम 9 व्यक्ति बड़ी सतर्कता से प्रातः ही अपने स्थानों
पर जा बैठते। उन दिनों पुलिस बहुत सशंक रहती थी। अतः हमें इस बात का विशेष
ध्यान रखना पड़ता कि हमारी कार्यवाही से किसी को किंचित मात्र भी सन्देह न
होने पाये, वरना सब खेल बिगड़ जायेगा। सभी मित्र मेरे घर में ठहरते और प्रातः
4 बजे मेरी माँ सबके लिए भोजन पकाती। 5 बजे उन्होंने एकाएक घोषणा कर दी
कि “अगर आज तुम काम पर नहीं जाओगे तो कल के भोजन का भी स्वयं ही
कहीं प्रबन्ध कर लेना।”
आख़िर 21 जनवरी 1919 का सुदिन आ पहुँचा। उसी दिन हमारे देश ने
प्रजातन्त्र शासन की स्थापना कर स्वतन्त्रता की घोषणा की थी। उसी दिन स्वतन्त्र
जातियों के नाम मैत्री का सन्देश भेजा था। इसी दिन आयरिश प्रजातन्त्र पार्लियामेण्ट
का प्रथम सम्मेलन हुआ था। हम आज भी नित्य की तरह अपनी जगह पर जाकर
बैठ गये। प्रतीक्षा के शान्तिदायक कितने ही घण्टे न जाने क्या-क्या सोचते हुए बिता
चुके थे। उस दिन डबलिन में होने वाली उपरोक्त महान घटना पर बातचीत करते
हुए कितना आनन्द अनुभव कर रहे थे। यह सोचकर कि आज की घटना से समस्त
संसार के सामने आयरलैण्ड भी उन्नत-शिर होकर खड़ा हो पायेगा, हम पुलकित
हो उठे। ठीक उसी समय निरन्तर टिप्रेरी की ओर ताकता रहने वाला हमारा जासूस
आ धमका। उसके नेत्रों से सांग्रामिक तत्परता तथा असीम आनन्द की ज्योति निकल
रही थी। उसने शीघ्रता से परन्तु दृढ़ता के साथ कह दिया, “वे आ रहे हैं! वे आ
रहे हैं!!” एकाएक हम सभी चौंक पड़े। हम सभी अपना-अपना स्थान तथा कर्तव्य
जानते थे। हर एक अपनी-अपनी जगह पर जा डटा। गुप्तचर ने लौटकर उनकी
संख्या तथा अन्तर भी बता दिया। अब उस नीरव स्थान में घोड़े की टाप तथा गाड़ी
710 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़