भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 715, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंघोषणा कर दी गयी कि आयरलैण्ड का चिर-स्थगित चुनाव दिसम्बर में होगा। वहाँ
युद्ध के दिनों में यह चुनाव न हुआ था। इस अन्तर में लोगों के भाव बहुत बदल
गये थे। उनका इंग्लैण्ड तथा पार्लियामेण्ट पर कोई विश्वास न रहा था। वे जानते
थे कि आयरलैण्ड के अल्पसंख्यक सदस्यों की वहाँ के नक़्क़ारखाने में कोई नहीं
सुनता। वे अपने सदस्यों को वहाँ भेजना व्यर्थ समझते थे। ख़ैर! अब के चुनाव के
लिए सिनफिनर उम्मीदवार खड़े किये गये ताकि वे पार्लियामेण्ट का बहिष्कार कर
दें। कुछ महीने खूब ज़ोर रहा। हम लोग भी अपना कार्य छोड़कर सिनफिनर
उम्मीदवारों की सफलता के लिए प्रयत्न करने लगे। बड़े-बड़े वक्ताओं ने देशभर
में जीवन संचारित कर दिया। देश में खूब जागृति थी, बड़ा जोश था। 105 में से
73 सिनफिनर उम्मीदवार सफल हुए, जिन्होंने ब्रिटिश पार्लियामेण्ट तक न जाकर
डबलिन में प्रजातान्त्रिक देश पार्लियामेण्ट स्थापित कर ली। उस पार्लियामेण्ट की
पहली बैठक 21 जनवरी, 1919 को हुई। उस दिन उन्होंने स्वतन्त्रता की घोषणा
की तथा अन्य स्वतन्त्र जातियों के नाम मैत्री के सन्देश भेजे। ठीक उसी दिन हमारे
छोटे से दल ने एक बड़ा भारी कार्य कर दिया। वह 'सोलोहैडबेग घटना' के नाम
से प्रसिद्ध है। उसका ब्यौरा अगले परिच्छेद में दिया जायेगा। बात यह थी कि
उपरोक्त चुनाव के कारण हमारा कार्य बहुत ढीला पड़ गया था। बहुत-से कार्यकर्ता
अब योद्धा अथवा सैनिक न रहकर राजनीतिज्ञ बन गये। दिनोंदिन अपने सैनिकों को
ढीला होता देखकर, हमने उन्हें ज़ोर-शोर से कार्य में जुटा देने का निश्चय किया।
कई बार मैंने इस बारे में श्री ट्रीसी से परामर्श भी किया। आख़िर वह अवसर भी
मिल ही गया, जिस दिन कि हमने अंग्रेज़ों के विरुद्ध युद्ध प्रारम्भ कर दिया।
तीसरा परिच्छेद
विस्फोटक की लूट,
आज़ादी की जंग का श्रीगणेश
जनवरी, 1919 के आरम्भ में हमें पता चला कि सोलोहैडबेग की खान की तरफ़
सरकारी विस्फोटक पदार्थ भेजे जायेंगे। मैंने तुरन्त ट्रीसी से जाकर कहा कि अब
चिर-प्रतीक्षित स्वातन्त्र्य-युद्ध को प्रगतिशील करने का समय आ पहुँचा है, और यह
बड़ा सुन्दर अवसर है जिसका सदुपयोग करने में हमें चूकना न चाहिए। मैं तब यह
भूला न था कि हमारे सैनिकों की संख्या बहुत ही कम थी और हमें महान
शक्तिशाली शत्रु से सामना करना था। परन्तु यह भी विश्वास था कि युद्ध छिड़ते
आयरिश स्वतन्त्रता-संग्राम / 709