भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 703, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंऔर तुम्हें इण्डियन सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी का सदस्य बनाकर सोवियत संघ
में अध्ययन के लिए भेजने को कहा था।” 25
गिरफ़्तारी से पहले भगतसिंह खुद भी सोवियत संघ जाकर समाजवाद के देश
को अपनी आँखों से देखना चाहते थे। ‘सोवियत संघ में नव मानव’ पुस्तक में
विजय कुमार सिन्हा लिखते हैं :
“उन दिनों ही शौक़त उस्मानी, जो कुछ दूसरे लोगों के साथ तीसरे कम्युनिस्ट
इंटरनेशनल की छठी कांग्रेस में भाग लेने के लिए चोरी-छिपे मास्को जा रहे थे,
कानपुर में मुझसे मिले और अपने साथ चलने को कहा।...मैंने भगतसिंह से बात की
: हमें लगा कि यह उचित समय नहीं है। हमने तय किया कि हम दोनों कुछ समय
बाद मास्को जायेंगे।” 26 दुर्भाग्यवश, यह योजना कभी साकार नहीं हो पायी।
कुलबीर सिंह ने, जिनकी कृपा से मैं उनके बड़े भाई भगतसिंह की जेल
डायरी का अध्ययन कर और उसकी नक़ल उतार सका, उनके जीवन तथा
कार्यकलाप पर अद्वितीय सामग्री जमा की है, जिसका बारीक़ी से अध्ययन किया
जाना चाहिए। उनके विचार में भगतसिंह जेल में कूट भाषा में भी एक डायरी रखते
थे, जो अभी तक नहीं मिल पायी है।
भगतसिंह के दूसरे भाई, कुलतार सिंह भी बड़े सौहार्द से मुझसे मिले। उनकी
सुपुत्री वीरेन्द्र सिंधू ने उपरोक्त पुस्तक लिखी है। इसमें वह बताती हैं कि जुलाई,
1929 में दिल्ली में मुक़दमे की सुनवाई में भगतसिंह ने कहा था : हम उस
ऐतिहासिक निष्कर्ष पर ज़ोर देते हैं, जिस पर हम पहुँचे हैं।...जिस तरह फाँसी के
तख़्ते और साइबेरिया की ख़ानों के डर से रूस में क्रान्ति की ज्वाला नहीं बुझी,
उसी तरह सरकार के आदेश और “असाधारण” क़ानून भारत में स्वतन्त्रता संग्राम
की ज्वाला नहीं बुझा सकते।
21 जनवरी, 1930 को लेनिन की पुण्य तिथि पर भगतसिंह और उनके साथी
लाल रूमाल गले में बाँधकर अदालत में आये। कटघरे में पहुँचते ही उन्होंने नारे
लगाये : “समाजवादी क्रान्ति ज़िन्दाबाद”, “कम्युनिस्ट इण्टरनेशनल ज़िन्दाबाद”,
“लेनिन का नाम अमर है”, “जनता ज़िन्दाबाद”, “साम्राज्यवाद मुर्दाबाद”।
इसके बाद भगतसिंह ने वह तार पढ़ा, जो उन्होंने और उनके साथियों ने तीसरे
इण्टरनेशनल को भेजने के लिए अदालत को दिया था। इसमें कहा गया था : लेनिन
दिवस पर हम उन सब लोगों का हार्दिक अभिवादन करते हैं, जो महान लेनिन के
विचारों को आगे ले जाने के लिए प्रयत्नशील हैं। रूस जो महान प्रयोग कर रहा
है, उसमें सफलता की कामना हम करते हैं। हम अन्तरराष्ट्रीय मज़दूर आन्दोलन की
आवाज़ में आवाज़ मिलाते हैं। सर्वहारा की जीत होकर रहेगी, पूँजीवाद की हार
होगी। साम्राज्यवाद मुर्दाबाद।
भारत में एक ऐसे व्यक्ति से भी मेरी मुलाक़ात हुई, जो भगतसिंह को फाँसी
शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 697