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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 702, कुल 788 में से

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पृष्ठ 702

साथी प्रयत्नशील हैं। एकाधिक बार वह सोवियत रूस के इतिहास की ओर उन्मुख
हुए, शारीरिक और बौद्धिक श्रम के लिए समान पारिश्रमिक तथा जन शिक्षा के क्षेत्र
में उसकी नीति का उदाहरण दिया। भावी समाज में युद्धों के उन्मूलन की
भविष्यवाणी करते हुए उन्होंने लिखा कि सोवियत रूस को सर्वहारा अधिनायकत्व
का देश होने के कारण पूँजीवादी समाज से अपनी रक्षा के लिए फ़ौज रखनी पड़
रही है।
भगतसिंह की जेल की डायरी और दूसरी सामग्रियाँ, जिन पर यहाँ गौर किया
गया है, इस युवा क्रान्तिकारी के दृष्टिकोण का विकास दिखाती हैं। साथ ही वे इस
लिहाज़ से भी अमूल्य हैं कि इनमें हमें भगतसिंह की विचारधारात्मक खोजों का पता
चलता है, हम देखते हैं कि भारतीय राष्ट्रीय क्रान्तिकारियों का मार्क्सवाद की ओर
रुझान था और वे लेनिन तथा अक्टूबर क्रान्ति के विचारों से प्रभावित हुए थे।
भगतसिंह तत्कालीन मध्यवर्गीय नौजवानों की, जो कांग्रेस के बुर्जुआ नेताओं
से निराश थे, भावनाओं का मूर्त रूप हैं। इन नौजवानों को भगतसिंह ने यह दिखाया
कि उन्हें कौन-सा रास्ता पकड़ना चाहिए। जब इस क्रान्तिकारी को फाँसी दे दी
गयी, तो उनके उदाहरण का अनुसरण करते हुए क्रान्तिकारी दलों ने जेल में ही
मार्क्सवाद के अध्ययन के लिए पाठ्यक्रमों का प्रबन्ध किया।
सोवियत संघ में हो रहे क्रान्तिकारी कायाकल्प तथा पार्टी कार्यकर्ताओं को
शिक्षित करने की उसकी विचारधारात्मक और राजनीतिक प्रणाली से भगतसिंह
बहुत आकर्षित हुए। वह अक्टूबर क्रान्ति के अनुभव का प्रत्यक्ष अध्ययन करना
चाहते थे और उन्होंने अपने साथियों से ऐसे योग्य उम्मीदवार चुनने को भी कहा,
जिन्हें इस उद्देश्य से मास्को भेजा जा सके।
सुविख्यात स्वतन्त्रता सेनानी बाबा पृथ्वी सिंह आज़ाद ने ‘लेनिन की धरती
में’ नामक अपनी पुस्तक में लिखा है :
“उन दिनों भगतसिंह जेल में मार्क्सवाद-लेनिनवाद का अध्ययन कर रहे थे
और उनकी क्रान्तिकारी दृष्टि को एक नया, अधिक परिपक्व आयाम प्राप्त हो रहा
था। वह भारत की स्वतन्त्रता तथा जनसाधारण की शोषण से मुक्ति की समस्या
पर अधिक व्यापक परिप्रेक्ष्य में पुनर्विचार कर रहे थे। वह भली भाँति जानते थे कि
उन्हें फाँसी होगी। परन्तु शहीद होने से पहले वह आश्वस्त हो जाना चाहते थे कि
भारत में क्रान्तिकारी आन्दोलन उस नयी अवस्था में पदार्पण कर ले, जिसकी
कल्पना उन्होंने मार्क्सवादी सिद्धान्तों और सोवियत क्रान्ति के अध्ययन के आधार
पर की थी।”
आगे वह लिखते हैं : “चन्द्रशेखर और धन्वन्तरि ने मुझसे कहा : सरदार
भगतसिंह जेल में मार्क्स और लेनिन के कम्युनिस्ट दर्शन का गहरा अध्ययन करते
रहे थे और अपने साथियों को भी इसकी प्रेरणा देते रहे थे।...उन्होंने ही तुमसे मिलने
696 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़