सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 695, कुल 788 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 695

नोट किया कि “दासता को बाइबिल के पुराने और नये धर्मग्रन्थों में मान्यता प्राप्त
है और ईश्वर की सत्ता उसकी निन्दा नहीं करती।” भगतसिंह आगे लिखते हैं कि
उसी वर्ष चार्ल्सटन बैपटिस्ट एसोसिएशन ने “अपने दासों के समय का उपयोग
करने के मालिकों के अधिकार” की पुष्टि की। इस सिलसिले में भगतसिंह ने इस
बात पर ज़ोर दिया कि धर्म ने “पूँजीवाद का समर्थन” किया है।
धर्म की उत्पत्ति के कारणों और उसके मर्म को समझने की चेष्टा में वह मार्क्स
की ओर उन्मुख हुए। पृष्ठ 40 पर हम मार्क्स की रचना ‘हेगेल के न्याय-दर्शन
की समालोचना का प्रयास’ से ‘धर्म के बारे में मार्क्स के विचार’ शीर्षक का
एक उद्धरण पाते हैं : “...मनुष्य धर्म की रचना करता है, धर्म मनुष्य की रचना नहीं
करता।...मनुष्य का अर्थ है मनुष्य का संसार, राज्य, समाज। यह राज्य, यह समाज
धर्म को, एक विकृत विश्वदृष्टिकोण को जन्म देते हैं, क्योंकि वे स्वयं एक विकृत
संसार हैं। धर्म इस संसार का सामान्य सिद्धान्त, उसका सार-संग्रह, सुबोध रूप में
उसका तर्क है।...धर्म के विरुद्ध संघर्ष परोक्ष रूप से उस संसार के विरुद्ध संघर्ष
है, जिसका आध्यात्मिक सन्तोष धर्म है।.. धर्म जनता के लिए अफ़ीम है।”
उल्लेखनीय है कि पृष्ठ 192 पर भगतसिंह ने अन्तिम वाक्य दोहराया है।
सो, अपने नोटों में भगतसिंह ने पूँजीवाद के उन्मूलन के पक्ष में ठोस तर्क पेश
किये। मार्क्सवाद-लेनिनवाद के संस्थापकों की भाँति वह भी यही मानते थे कि
भावी समाज केवल समाजवादी समाज ही हो सकता है। उनके नोटों में भावी समाज
का कोई विस्तृत विवरण तो नहीं है, किन्तु कुछ विचार यह दिखाते हैं कि वह
समाजवाद की धारणा का वैज्ञानिक अर्थ लगाते थे। उन्होंने भावी समाज के
दक्षिणपन्थी सामाजिक-जनवादियों के आदर्श को अस्वीकार किया तथा पूँजीवाद
के स्थान पर समाजवाद लाने की समस्या के प्रति सामाजिक-सुधारवादी रुख को
भी। उन्होंने पश्चिम के दक्षिणपन्थी समाजवादियों की भर्त्सना की और आर.
मैकडोनाल्ड को “ब्रिटिश लेबर पार्टी का साम्राज्यवादी नेता” कहा (पृष्ठ 13)।
पृष्ठ 52 पर दूसरे इण्टरनेशनल के नेताओं द्वारा मज़दूर वर्ग के ध्येय से की गयी
ग़द्दारी के बारे में हिलक्विट की पुस्तक से एक उद्धरण है।
जेल में वह पूरी तरह पूँजीवादी व्यवस्था का तख़्ता पलटने तथा सारी
मानवजाति के हित में अर्थव्यवस्था और सारी प्राकृतिक सम्पदा पर नियन्त्रण
स्थापित करने की ओर लक्षित विश्व समाजवादी क्रान्ति के विचार में तल्लीन रहे।
पृष्ठ 190 पर उन्होंने लिखा : “समाजवादी व्यवस्था : प्रत्येक से उसकी योग्यता
के अनुसार, प्रत्येक को उसकी आवश्यकता के अनुसार।” भगतसिंह समाजवाद में
संक्रमण को सर्वहारा के संघर्ष के साथ जोड़ते थे, जो भावी समाज में शासक वर्ग
बनेगा। पृष्ठ 69 पर ‘कम्युनिस्ट पार्टी के घोषणापत्र’ का एक उद्धरण है :
“...मज़दूर वर्ग की क्रान्ति का पहला क़दम सर्वहारा वर्ग को उठाकर शासक वर्ग
शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 689