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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 682, कुल 788 में से

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पृष्ठ 682

पृष्ठ 284 (141)
भारत जैसा मैंने इसे जाना$^1$
एक ‘महात्मा’ का रास्ता सचमुच कठिन है, और यह आश्चर्यजनक नहीं है
कि गाँधी ने हाल ही में इस उपाधि को – और इसकी ज़िम्मेदारियों को त्याग देने
की कोशिश की है। भारत में उनका प्रभाव निरन्तर घटता जा रहा है, फिर भी उनका
संन्यासी का बाना और महान नैतिक सच्चाइयों के रूप में उनके द्वारा अत्यन्त
कुशलता से निरूपित किये जाने वाले अस्पष्ट और अव्यावहारिक तोलस्तोय मार्का
सिद्धान्त बहुतेरे लोगों को सार्थक लगने का भ्रम देते हैं तथा भावुक इंग्लैण्ड के
दुर्बल मन वाले तथा फ़्रांस के कुछ तर्कशील लोग भी इसी भ्रम में हैं, जो पूर्व से
एक नयी रोशनी की उम्मीद लगाये हुए हैं। पृष्ठ 65
भेदिया$^2$ :
आयरिश षड्यन्त्रों में जो घृणित लेकिन उपयोगी वर्ग आमतौर पर (भेदियों
की – स.) आपूर्ति किया करता था, वह जड़मूल से क्यों सूख गया, इसके मुख्य
कारणों में से मैं समझता हूँ एक तो यही रहा है कि सत्ताधारी अपने भेदिये को
छिपाने और बचाने में असफल रहे (जैसे जेम्स कैरी के मामले में, जबकि उसी
ने क्रान्तिकारियों के अभेद्य गिरोह का रहस्योद्घाटन किया था और उसी के साक्ष्य
पर ब्रैडी, फिट्ज़हरबर्ट और मुलेन को फीनिक्स पार्क की दो हत्याओं, अर्थात चीफ़
सेक्रेटरी और अण्डरसेक्रेटरी की हत्याओं के बदले फाँसी पर चढ़ा दिया गया। उस
भेदिये की एक नौजवान क्रान्तिकारी ओ'डॉनैल ने, डरबन में, दिन-दहाड़े गोली
मारकर हत्या कर दी।$^3$) गो कि हत्या करने वाला पकड़ा गया। महायुद्ध से पहले

  1. सर माइकेल ओ'ड्वायर (1885-1823) की पुस्तक इण्डिया ऐज़ आई निउ इट से
    उद्धृत, जो 1925/28 में लन्दन से प्रकाशित हुई। 1988 में मित्तल पब्लिकेशंस, दिल्ली से
    पुनर्मुद्रित। ओ'ड्वायर प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान पंजाब का लेफ्टिनेण्ट गवर्नर था, उसने पंजाब
    से बड़े पैमाने पर नौजवानों की ज़बरन सेना में भरती करायी, लोगों को युद्ध के लिए सरकार
    को ऋण देने पर बाध्य किया और राजनीतिक नेताओं को क्रूरतापूर्वक प्रताड़ित किया।
    जलियाँवाला बाग़ काण्ड का उसने समर्थन किया। बाद में, ऊधमसिंह ने लन्दन में उसकी हत्या
    कर दी।
  2. इस हिस्से में ओ'ड्वायर ने आयरलैण्ड के क्रान्तिकारियों द्वारा ब्रिटिश सरकार के भेदियों
    के सफाये का उदाहरण देते हुए पंजाब में खुद उसके द्वारा क्रान्तिकारियों के विरुद्ध अपनाये
    तरीक़ों की चर्चा की है।
  3. जब आयरिश क्रान्तिकारियों ने फीनिक्स पार्क में चीफ़ और अण्डरसेक्रेटरियों की हत्या
    कर दी, तब उन्हें पकड़वाने और फाँसी चढ़वाने में जेम्स कैरी ने मुखबिर की भूमिका निभायी,
    हालाँकि उसकी भी पैट्रिक ओ'डोनेल नामक क्रान्तिकारी ने गोली मारकर हत्या कर दी, जिससे
    भारत के क्रान्तिकारियों को भारी मनोबल प्राप्त हुआ।
    676 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़