भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 681, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ें“भारत में कुल मतदाता 62,00,000 अर्थात भारत की कुल आबादी का 2¾
प्रतिशत हैं जिसमें वे क्षेत्र शामिल नहीं, जिन पर 1919 का क़ानून नहीं लागू होता
था।”
194
आइ.ओ.एन.¹
पृष्ठ 283 (140)²
इण्डिया ओल्ड एण्ड न्यू : शिरोल वी.
“ब्रिटिश लोग यह जान लें कि यदि वे न्याय नहीं करना चाहते, तो यह प्रत्येक
भारतीय का परम कर्त्तव्य बन जायेगा कि इस साम्राज्य को नष्ट कर दे।”
महात्माजी³ (नागपुर कांग्रेस)
देहात और शहर का सवाल
कुछ सरकारी बुद्धिमत्ता इस रूप में दिखायी गयी थी कि भौगोलिक स्थिति
पर बिना ध्यान दिये, दूर-दराज के शहरों को एक निर्वाचन क्षेत्र में रख दिया गया
था, ताकि ऐसे शहरी व्यक्तियों को, जोकि (सरकार के) न चाहते हुए भी अधिक
विकसित राजनीतिक दृष्टिकोण पा चुके थे, उन देहाती निर्वाचन क्षेत्रों से उम्मीदवार
बनने से रोका जा सके, जिनमें यदि उपर्युक्त व्यवस्था न की गयी होती तो कई
एक छोटे शहर भी स्वाभाविक तौर पर शामिल हो जाते। यह एक आख़िरी कोशिश
थी जो इस विश्वास पर आधारित थी कि पंजाब की आबादी को बकरियों और
भेड़ों के रूप में विभाजित किया जा सकता था, जिसमें बकरियाँ ‘विश्वासघाती’
शहरी लोग तथा भेड़ें ‘विश्वासपात्र’ किसान समुदाय के लोग माने गये थे।⁴
खालसा कालेज 1892 में स्थापित हुआ⁵
- शिरोल की पुस्तक इण्डिया ओल्ड एण्ड न्यू
- नोटबुक पृष्ठ 282 के बाद पृष्ठ 283 का क्रम तो ठीक है पर (138) के बाद (139) नहीं,
बल्कि (140) दिया गया है। - महात्मा गाँधी; शिरोल की पुस्तक इण्डिया ओल्ड एण्ड न्यू से उद्धृत
- इण्डिया ओल्ड एण्ड न्यू से ही उद्धृत
- मूल में, पेज के नीचे की ओर हाशिये पर तिरछा लिखा हुआ
शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 675