भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 683, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंऔर उसके दौरान, पंजाब के लेफ़्टीनेण्ट गवर्नर के रूप में, मेरा कई क्रान्तिकारी
षड्यन्त्रों से पाला पड़ा, जिनका पर्दाफ़ाश करने में भेदियों की जाति ने एक बड़ी
भूमिका अदा की, और हमारी सतर्कता इतनी मुकम्मल रही कि एक भी मामले
में किसी भी भेदिये पर कोई आँच नहीं आयी।¹
पृष्ठ 285 (142)
मैं समझ सकता हूँ कि अपनी नीचताभरी चालबाज़ी, असामान्य अहम्मन्यता,
दुरभिसन्धि रचने की अपनी जन्मजात रुझान, और अरुचिकर तथ्यों पर पर्दा डालने
की क्षमता से पूरी तरह लैस भारतीय षड्यन्त्रकारी कैसे इस माहौल में आराम से
काम करते थे।
पृष्ठ 187
इण्डिया ऐज़ आइ निउ इट²
आर्यसमाज :
वास्तव में आर्यसमाज पश्चिमी प्रभाव के विरुद्ध एक राष्ट्रवादी पुनर्जागरण है।
यह इस सम्प्रदाय के संस्थापक दयानन्द के आधिकारिक ग्रन्थ, सत्यार्थ प्रकाश में
अपने अनुयायियों का आह्वान करता है कि वे वेदों की ओर लौटें और आर्यों के
काल्पनिक स्वर्णिम अतीत में स्वर्णिम भविष्य की तलाश करें। सत्यार्थ प्रकाश
गैर-हिन्दू शासन के विरुद्ध दलीलें भी देता है, और कुछ वर्ष पहले, इस सम्प्रदाय
के एक अग्रणी मुखपत्र ने तो दयानन्द को ही स्वराज के सिद्धान्त का असली
प्रवर्त्तक होने का दावा भी किया।
लेकिन 1907 में जब कुछ शरारती लोगों ने आर्य समाज के विरुद्ध अफ़वाहें
फैलाना शुरू किया, तब इस सम्प्रदाय ने अपने पुराने धर्म सिद्धान्त को दोहराते हुए
इस आशय का एक प्रस्ताव प्रकाशित करने की बुद्धिमत्ता दिखायी कि इस संगठन
का किसी भी क़िस्म के राजनीतिक निकाय या किसी भी क़िस्म के राजनीतिक
आन्दोलन से कोई सम्बन्ध नहीं है। अब यदि एक निकाय के रूप में समाज द्वारा
चरमपन्थी राजनीति से सम्बन्ध-विच्छेद के इस दावे को मान भी लिया जाये, तब
भी कट्टर हिन्दुओं के लिए यह बात ग़ौरतलब होनी ही चाहिए कि भले ही, आर्य
समाज में पंजाब की हिन्दू आबादी के 5 प्रतिशत से अधिक लोग शामिल नहीं हैं,
फिर भी 1907 से लेकर आज तक हिन्दुओं की एक बड़ी आबादी जो राजद्रोह
- ओ'ड्वायर की पुस्तक इण्डिया ऐज़ आई निउ इट से
- ओ'ड्वायर की पुस्तक
शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 677