भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 680, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंअपनाया, जिसने सोने की मुद्रा पाने की लालच में पूर्वजों के नाम को कलंकित
किया – आज उस दुराचारी को तुमने भारत की इस पवित्र धरती से मिटा दिया
है। नरेन गोसाईं¹ से लेकर तलित चक्रवर्ती तक सभी उस कमीने जालसाज़
शम्स-उल-आलम की जालसाज़ियों और यातना के फलस्वरूप सरकारी गवाह बन
गये थे। अगर तुमने नरपिशाचों के इस मददगार की छुट्टी नहीं कर दी होती, तो
क्या भारत के लिए कोई उम्मीद बची रह जाती?
कई लोग यह चीख़-पुकार मचा रहे हैं कि विद्रोह करना महापाप है। लेकिन
विद्रोह है क्या? क्या भारत में कोई ऐसी चीज़ है, जिसके ख़िलाफ़ विद्रोह किया
जाए? क्या एक फिरंगी को भारत का राजा माना जा सकता है, जिसके स्पर्शमात्र
से, जिसकी महज परछाईं पड़ जाने से ही हिन्दू अपना शुद्धिकरण करने के लिए
बाध्य हो जाते हैं?
ये महज पश्चिमी लुटेरे हैं जो भारत को लूट रहे हैं...। उन्हें निकाल बाहर करो,
हे भारत के सपूतों! वे तुम्हें जहाँ कहीं भी मिलें, उन पर और उनके साथी जासूसों
और खुफ़िया एजेण्टों पर कोई रहम मत करो। पिछले वर्ष, अकेले बंगाल में ही 19
लाख लोग बुखार, चेचक, हैजा, प्लेग और दूसरी बीमारियों से मर गये। तुम
अपनेआप को भाग्यशाली समझो कि तुम बच गये, लेकिन याद रखो कि कल तुम
भी प्लेग और हैजा की चपेट में आ सकते हो। क्या तुम्हारे लिए बेहतर नहीं होगा
कि तुम बहादुरों की मौत मरो?
जब ईश्वर का यही विधान है, तो ज़रा सोचो, कि क्या इस शुभ बेला में भारत
के हरेक सपूत का कर्तव्य नहीं है कि वह इन गोरे दुश्मनों का संहार करे? [पृष्ठ
282 (138) पर जारी]² अपनेआप को प्लेग और हैजा से मत मरने दो, ऐसा करके
भारत माँ की पवित्र धरती को दूषित मत करो। पुण्य और पाप में फ़र्क़ करने के
लिए हमारे शास्त्र हमारे मार्गदर्शक हैं। हमारे शास्त्र बार-बार हमें बताते हैं कि इन
गोरे कमीनों और उनके सहयोगियों एवं सहअपराधियों को क़त्ल करना अश्वमेध
यज्ञ के बराबर है। आओ, सब के सब आओ। आओ हम सब मिलकर इस बलिवेदी
पर अपनी यज्ञाहुति अर्पित करें, और प्रार्थना करें कि इस यज्ञ में सारे गोरे साँप
इसकी ज्वाला में वैसे ही भस्म हो जायें जैसे जनमेजय यज्ञ में साँप नष्ट हो गये
थे। याद रखो, यह हत्या नहीं, यज्ञ है।
(पृष्ठ 342, नोट्स) आइ.यू.³
- पूरा नाम नरेन्द्रनाथ गोसाई : मुज़फ़्फ़रपुर बम काण्ड में (जिसके लिए खुदीराम बोस को
फाँसी दे दी गयी) ब्रिटिश सरकार का मुख़बिर, जिसे 31 अगस्त 1908 को कनाई लाल दत्त
और सत्येन्द्र नाथ दत्त ने मार डाला। - नोटबुक पृष्ठ संख्या 281 नहीं है, पर पृष्ठ (137) के बाद पृष्ठ (138) का क्रम ठीक
है। - शिरोल की पुस्तक इण्डियन अनरेस्ट
674 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़