भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 679, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 280 (137)
हत्या नॉय यज्ञ¹
सोने की मुद्रा पाने के लालच में मानव वेषधारी कुछ देशी नरपिशाचों, भारत
के कलंक - पुलिस - ने वारीन्द्र घोष² आदि उन महान सपूतों को गिरफ़्तार कर
लिया, जो अपने निजी हितों का बलिदान करके और बम बनाने जैसे 'यज्ञ' के
पवित्र अनुष्ठान को पूरा करने में अपने जीवन को समर्पित करके, अपने देश की
आज़ादी के लिए काम कर रहे थे। इन नरपिशाचों में सबसे बड़ा नरपिशाच, आशुतोष
विश्वास³ इन बहादुर सपूतों को फाँसी के तख्ते पर पहुँचाने का रास्ता साफ़ करने
लगा। लेकिन शाबास चारू⁴! (आशुतोष विश्वास को ख़त्म करने वाले) तुम्हारे
माँ-बाप सर्वपूज्य हैं। तुमने उनका गौरव बढ़ाया, सर्वोच्च साहस का परिचय दिया,
जो इस क्षणभंगुर जीवन की परवाह न करते हुए, उस नरपिशाच की इस दुनिया
से छुट्टी कर दी। अभी ज़्यादा दिन नहीं हुए जब गोरों ने, छल-बल से भारत को
भारतीयों (मूल पाठ में मुहम्मदनों – स.) से, उचक्कों की तरह झपट लिया था।
और वह कमीना शम्स-उल-आलम⁵, जिसने उस आलमगीर पादशा⁶ का रास्ता
- हत्या नहीं यज्ञ : यह पूरा अवतरण शिरोल की पुस्तक इण्डियन अनरेस्ट (मैकमिलन एण्ड
कम्पनी, लन्दन से 1910 में प्रकाशित) के टिप्पणियों वाले हिस्से से लिया गया है। इसमें “द
रिमूवल ऑफ़ इनफार्मर्स” (भेदियों का सफाया) शीर्षक के अन्तर्गत लिखा गया है कि
“शम्स-उल-आलम की हत्या के तुरन्त बाद निम्नलिखित अपील” क्रान्तिकारियों द्वारा कलकत्ते
में जारी की गयी :
‘हत्या नॉय यज्ञ’ (हत्या नहीं यज्ञ)
नक़द इनाम : एक यूरोपीय या दो भेदियों का सिर काटने पर
50वाँ अंक, कलकत्ता, रविवार चैत्र अष्टमी 1316) - वारीन्द्र घोष : अरविन्दो घोष के छोटे भाई और क्रान्तिकारियों के मानिकतला ग्रुप के
एक नेता, जो अलीपुर षड्यन्त्र केस (मई 1909) के अभियुक्त थे; वे ‘युगान्तर’ नामक
क्रान्तिकारी पत्र भी प्रकाशित करते थे। - आशुतोष विश्वास : क्रान्तिकारियों को सज़ा दिलाने के लिए तमाम गलत तरीक़े अपनाने
वाला अंग्रेज़परस्त एक सरकारी वकील जिसे अलीपुर पुलिस कोर्ट से बाहर क्रान्तिकारी चारु
चन्द्र गुहा ने गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। - चारुचन्द्र गुहा : एक वीर तरुण जिसने दायें हाथ की हथेली जन्म से ही नहीं होने के
बावजूद देशद्रोही सरकारी वकील आशुतोष विश्वास को गोली मार दी। उसे 10 मार्च 1909
को अलीपुर सेन्ट्रल जेल में फाँसी दे दी गयी। - शम्स-उल-आलम : ब्रिटिश पुलिस का सी.आई.डी. इंस्पेक्टर जो क्रान्तिकारियों की
सुराग़रशी करता था। उसे वीरेन्द्रनाथ दत्त ने 24 जनवरी, 1910 को गोली से उड़ा दिया; इस
नौजवान क्रान्तिकारी को 21 फ़रवरी 1910 को फाँसी दे दी गयी। - आलमगीर पादशा : मुगल बादशाह औरंगजेब
शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 673