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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 677, कुल 788 में से

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पृष्ठ 677

कि जब तक ब्रिटिश शासन एक वास्तविकता बना रहेगा, तब तक भारतीय सरकार,
जैसाकि लॉर्ड मोसली ने साफ़तौर पर कहा है, एक निरंकुश तन्त्र ही हो सकता है
– जो भले ही कल्याणकारी हो और भारतीय विचारों के साथ पूरी सहानुभूति रखे,
फिर भी एक निरंकुशतन्त्र ही होगा।
154, अनरेस्ट¹
कांग्रेस का उद्देश्य या लक्ष्य :
“भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का उद्देश्य भारतीय जनता को सरकार की एक ऐसी
प्रणाली उपलब्ध कराना है जो ठीक वैसी ही हो जैसीकि ब्रिटिश साम्राज्य के
अन्तर्गत स्व-शासित देश चला रहे हैं, जिसमें वे साम्राज्य के अधिकारों और दायित्वों
में बराबर के भागीदार हों।”
मालवीय जी का अध्यक्षीय भाषण 1909²
(कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन)
पृष्ठ 276 (136)
स्वतन्त्र भारत का संविधान¹
और कोई नहीं, बल्कि स्वयं (भारत) माँ ही यह तय करेगी और कर
सकती है कि एक बार जब वह अपनी अस्मिता पा लेती है और आज़ाद हो
जाती है तो इस क्रान्ति के सम्पन्न हो जाने के बाद वह अपने जीवन के
मार्ग-दर्शन के लिए कौन-सा संविधान अपनायेगी...। बिना विस्तार में गये, हम
इतना कह सकते हैं कि भारतीय राष्ट्र की इम्पीरियल सरकार का मुखिया
राष्ट्रपति बनेगा या राजा, यह इस पर निर्भर करता है कि यह क्रान्ति स्वयं को
कैसे आगे बढ़ाती है...। माँ का आज़ाद होना, उसका अखण्ड और एक होना,
तथा उसकी इच्छा का सर्वोपरि रहना ज़रूरी है। उसके बाद ही वह अपनी
इच्छा ज़ाहिर कर सकती है कि वह अपने सिर पर राजसी मुकुट धारण करे
या अपनी पवित्र काया को गणतान्त्रिक परिधान से आवेष्ठित करे।

  1. शिरोल की इण्डियन अनरेस्ट; भगतसिंह ने शिरोल की पुस्तक से विस्तृत नोट्स लिये हैं।
    ख़ासकर इसमें उद्धृत नेताओं के भाषणों और परचों से। पीछे आया बिपिनचन्द्र पाल का लम्बा
    उद्धरण और आगे आया मदनमोहन मालवीय का उद्धरण इसी पुस्तक से लिया गया है।
  2. पण्डित मदन मोहन मालवीय (1861-1946)
    शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 671