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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 676, कुल 788 में से

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पृष्ठ 676

के अलावा और कुछ नहीं है और कि इससे मुक्ति का एवं सभी बुराइयों के अन्त
का, एकमात्र उपाय अस्तित्वहीन हो जाने में ही है।
शिरोल पृष्ठ 26
इण्डियन अनरेस्ट ¹
शिक्षा नीति :
भारत में पश्चिमी शिक्षा को चालू करने का मूल मन्तव्य नौजवान भारतीयों की
एक अच्छी-खासी संख्या को प्रशिक्षित करना था, ताकि सरकारी दफ़्तरों में मातहती
पदों को अंग्रेज़ी बोलने वाले देशज लोगों से भरा जा सके।
पृष्ठ 34²
पृष्ठ 277 (134)
ब्रिटिश नौकरशाही के अत्याचार के ख़िलाफ़ अपनेआप को राजनीतिक
आन्दोलन में झोंक देने वाले कितने पश्चिमी शिक्षाप्राप्त भारतीयों ने अपने
देशवासियों को उनकी सामाजिक बुराइयों की नृशंसता से मुक्त करने के लिए
कभी अँगुली उठायी है? उनमें से कितने ऐसे हैं जो स्वयं इससे मुक्त हैं, या,
यदि मुक्त भी हैं, तो क्या उनमें अपने विचार के अनुसार आचरण करने का
साहस भी है?
इण्डिया ओल्ड एण्ड न्यू, पृष्ठ 107³
पृष्ठ 278 (135 )
किसी भारतीय संसद की कल्पना करना कठिन है!
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस लगभग शुरू से ही एक संसद की कार्यशैली अख़्तियार
कर चुकी थी। परन्तु भारत में संसद की न तो कोई गुंजाइश थी, और न है कारण

  1. सर वैलेन्टाइन शिरोल (1858-1929) : एक मशहूर ब्रिटिश पत्रकार, जिन्होंने भारत
    का 17 बार दौरा किया; उन्होंने भारत सम्बन्धी दो प्रमुख किताबें लिखीं : इण्डियन अनरेस्ट
    और इण्डिया : ओल्ड एण्ड न्यू। वह 1890 से 1912 तक लन्दन के ‘टाइम्स’ अख़बार के
    विदेश विभाग के प्रभारी थे तथा 1912 से 1914 तक भारतीय लोक सेवा आयोग के सदस्य
    भी रहे।
  2. इण्डियन अनरेस्ट से
  3. शिरोल की पुस्तक
    670 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़