भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 675, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंरहे। लेकिन तब साम्राज्य के भीतर इसका क्या मतलब होगा? इसका मतलब यह
होगा कि इंग्लैण्ड को चुंगी सम्बन्धी कुछ तरजीह पाने के लिए हमारे साथ कुछ
क़रार करने को बाध्य होना पड़ेगा। अगर इंग्लैण्ड भारत के हमारे बाज़ारों में प्रवेश
की खुली छूट चाहेगा, तो उसे हमारे द्वारा रखी गयी शर्तों के तहत ही आना होगा,
और एक समय के बाद जब हम अपने संसाधनों का विकास कर लेंगे और अपने
औद्योगिक जीवन को सुव्यवस्थित कर लेंगे, तब हम सिर्फ़ इंग्लैण्ड के लिए ही
नहीं, बल्कि ब्रिटिश साम्राज्य के हरेक हिस्से के लिए अपना दरवाज़ा खोल देंगे।
और क्या तुम समझते हो कि इंग्लैण्ड जैसा मुट्ठीभर आबादी वाला एक
छोटा-सा देश, जो चाहे कितना भी अधिक सम्पन्न क्यों न हो, निष्पक्षता और
बराबरी की शर्तों पर, भारत जैसे प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर देश के साथ
प्रतियोगिता कर सकेगा, जिसके पास इतनी भारी आबादी है, जो दुनिया के किसी
भी भाग में सबसे शालीन और संयमी समझी जाती है?
“अगर साम्राज्य के भीतर सचमुच हमारी अपनी सरकार हो जाये, अगर 30
करोड़ लोगों को वही स्वतन्त्रता मिल जाये जो साम्राज्य को हासिल है, तब तो
ब्रिटिश साम्राज्य रह ही नहीं जायेगा। भारतीय साम्राज्य हो जायेगा...।”
बि.च. पाल ¹
न्यू स्पिरिट, 1907 में
पृष्ठ 276 (133)
हिन्दू सभ्यता :
हमें ऐसा लग सकता है कि अपने कई पक्षों की दृष्टि से यह एक ऐसा लगभग
अकल्पनीय-सा समुच्चय है जिसमें एक तरफ़ आध्यात्मिक भाववाद है तो दूसरी
तरफ़ स्थूल भौतिकवाद भी है, एक तरफ़ इन्द्रियनिग्रह है तो दूसरी तरफ़
इन्द्रियलिप्सा भी है, एक तरफ़ यह मानवीय आत्मा को वैश्विक आत्मा के साथ
एकाकार करने का दर्पभरा दावा करती है तथा मनुष्य को दैवीयता में और दैवीयता
को मनुष्य में समाहित करती है, तो दूसरी तरफ़ वह हताश कर देने वाला निराशावाद
भी है जिसके तहत यह उपदेश देती है कि जीवन अपनेआप में दुखदायी प्रतीति
- बिपिनचन्द्र पाल (1858-1932) : स्वाधीनता संग्राम के दौरान बंगाल में एवं अन्यत्र
स्वदेशी एवं विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार आन्दोलनों के प्रमुख नेता; बाल गंगाधर तिलक, लाला
लाजपत राय और बिपिनचन्द्र पाल यानी 'लाल-बाल-पाल' की तिकड़ी ने कांग्रेस में 'गरम
दल' का नेतृत्व किया। पाल ने कई अख़बारों जैसे न्यू इण्डिया, वन्देमातरम, स्वराज, द
इण्डिपेण्डेण्ट एवं न्यू स्पिरिट का सम्पादन किया।
शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 669