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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 674, कुल 788 में से

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पृष्ठ 674

के लिए धन्यवाद तो दे दूँगा, पर उस चीज़ को स्वीकार नहीं करूँगा जिसे मैंने स्वयं
अपने हाथों से अर्जित नहीं किया है...।
“कोई भी सत्ता जो हमारे विरुद्ध जाती है, उसे हम बरबस अपनी मर्ज़ी के आगे
झुकने के लिए मजबूर करेंगे।
“...बुनियादी चीज़ सरकार की गरिमा है। [पृष्ठ 274 (131) पर जारी]
“क्या साम्राज्य के भीतर स्व-शासन का होना वास्तव में एक व्यावहारिक
आदर्श हो सकता है? इसका मतलब क्या होगा? इसका मतलब या तो हमारा
कोई स्व-शासन नहीं होगा, या इंग्लैण्ड का हमारे ऊपर कोई वास्तविक आधिपत्य
नहीं होगा। क्या हम स्व-शासन के मात्र छायाभास से ही सन्तुष्ट हो लेंगे? अगर
नहीं तो क्या इंग्लैण्ड हमारे ऊपर अपने मात्र छायाभासी आधिपत्य से ही सन्तुष्ट
हो लेगा? दोनों ही दशाओं में, इंग्लैण्ड एक छायाभासी आधिपत्यभर से ही सन्तुष्ट
नहीं हो सकता, और हम भी मात्र छायाभासी स्व-शासन से सन्तुष्ट होने से इन्कार
करते हैं। और इसीलिए भारत में स्व-शासन और इंग्लैण्ड के उस पर आधिपत्य
के बीच ऐसी परिस्थितियों में कोई समझौता सम्भव नहीं है...। यदि स्व-शासन –
वास्तविक – हो, तो सिर्फ़ भारत में ही नहीं, बल्कि स्वयं ब्रिटिश साम्राज्य के
भीतर इंग्लैण्ड की स्थिति क्या होगी? स्व-शासन का मतलब है स्वयं टैक्स
लगाने का अधिकार, इसका मतलब है अपना नियन्त्रण, इसका मतलब है अपनी
जनता को विदेशी निर्यातों पर संरक्षणात्मक और निषेधात्मक चुंगी लगाने का
अधिकार। जिस क्षण हमको खुद टैक्स लगाने का अधिकार मिल जायेगा, उस
क्षण हम क्या करेंगे? तब हम औद्योगिक बायकाट के इस कठिन काम में लगने
की कोशिश नहीं करेंगे। बल्कि वही करेंगे जो हरेक राष्ट्र करता आया है। आज
हम जिन परिस्थितियों में जी रहे हैं, उनके मद्देनज़र हम मैनचेस्टर से आने वाले
कपड़े के एक-एक इंच पर, और लीड्स से आने वाली एक-एक ब्लेड या छुरी
पर, भारी निषेधात्मक और संरक्षणात्मक चुंगी लगा देंगे। हम अपने देश में एक भी
अंग्रेज़ को घुसने की अनुमति नहीं देंगे। आज जिस तरह ब्रिटिश पूँजी भारतीय
संसाधनों के विकास के नाम पर यहाँ लगी हुई है, उसकी हम कतई अनुमति
नहीं देंगे। हम ब्रिटिश पूँजीपतियों को देश की खनिज सम्पदा की खुदाई करने
और उसे अपने देश उठा ले जाने का कोई अधिकार नहीं देंगे। [पृष्ठ 275 (132)
पर जारी] हमें विदेशी पूँजी की ज़रूरत होगी। पर इसके लिए हम पूरी दुनिया के
खुले बाज़ारों से विदेशी कर्ज़ लेने की दरख्वास्त करेंगे, और कर्ज़ की वापसी के
लिए भारतीय सरकार, भारतीय राष्ट्र की साख की गारण्टी देंगे...। और आज जिस
तरह से इंग्लैण्ड के वाणिज्यिक हित सिद्ध हो रहे हैं, तब, जनता के स्व-शासन
की दशा में, नहीं सिद्ध होंगे, भले ही यह सरकार साम्राज्य के अधीन ही क्यों न
668 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़