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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 666, कुल 788 में से

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पृष्ठ 666

दो मिलियन लाइवर में शाही ज़मीन बेच डालने का आरोप लगाया। इसे उसने
लिखित रूप में भी पेश किया। उसके कुछ ही समय बाद, एम. कैलोन को
बरख़ास्त कर दिया गया।
तोलूस का आर्कबिशप प्रधानमन्त्री और वित्तमन्त्री नियुक्त हुआ। उसने
पार्लियामेण्ट के समक्ष दो प्रकार के टैक्सों का प्रस्ताव रखा - स्टाम्प टैक्स और
एक क़िस्म का भूमि टैक्स। इस पर पार्लियामेण्ट ने जवाब दिया,
कि राष्ट्र अब तक जिस तरह के राजस्व की हिमायत करता आ
रहा है, उसके साथ टैक्सों की चर्चा उनमें कटौती करने के अलावा
और किसी भी उद्देश्य से नहीं करनी चाहिए,
और उन दोनों ही प्रस्तावों को उठाकर रद्दी की टोकरी में फेंक दिया। तब उन्हें
वर्साई बुलाया गया, जहाँ राजा ने 'ए बेड ऑफ़ जस्टिस' नाम से एक विशेष बैठक
की और उन प्रस्तावों का इन्दराज कर लिया। पार्लियामेण्ट पेरिस लौट गयी। वहाँ
एक अधिवेशन किया। वर्साई में की गयी प्रत्येक कार्यवाही को गैर-क़ानूनी क़रार
देते हुए, इन्दराज को रद्द कर देने का आदेश दिया। तब सबको 'लेटर डि कैशेत्स'
नामक शाही फ़रमान जारी हुआ और सभी को निर्वासित कर दिया गया। फिर बाद
में उन्हें वापस बुला लिया गया। और फिर वे ही फ़रमान उनके सामने रखे गये।
[पृष्ठ 185 (120) पर जारी]
फिर स्टेट्स जनरल की बैठक बुलाने का सवाल उठा। राजा ने इसके लिए
पार्लियामेण्ट से वादा किया। लेकिन मन्त्रिमण्डल ने विरोध किया, और एक 'फुल
कोर्ट' गठित करने का नया प्रस्ताव रखा। लेकिन इसका दो आधारों पर विरोध हुआ
: पहला यह कि सैद्धान्तिक आधार पर सरकार को स्वयं को बदलने का कोई
अधिकार नहीं था। इस तरह की नज़ीर नुक़सानदेह होगी। दूसरा विरोध स्वरूप को
लेकर था, इसके विरोध में यह दलील दी गयी कि यह एक विस्तारित मन्त्रिमण्डल
के अलावा और कुछ न होता।
अतः पार्लियामेण्ट ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। तब उसे सशस्त्र सेनाओं से
घेर लिया गया। कई दिनों तक यह घेरेबन्दी चलती रही। फिर भी पार्लियामेण्ट
अपनी बात पर अड़ी रही। तब उसके कई सदस्यों को गिरफ़्तार करके अलग-अलग
जेलों में भेज दिया गया।
इसका विरोध-प्रदर्शन करने के लिए ब्रिटैनी से एक प्रतिनिधिमण्डल आया।
उसके सदस्यों को बास्तीय (जेल) भेज दिया गया।
'असेम्बली ऑफ़ नोटेबल्स' फिर बुलायी गयी, और स्टेट्स जनरल की बैठक
बुलाने के लिए फिर वही तरीक़ा अपनाने का फ़ैसला किया गया, जो 1614 में
अपनाया गया था।
पार्लियामेण्ट ने तय किया कि इसके लिए कुल 1200 सदस्यों में से 600
660 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़