भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 662, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ें...मुझसे पूछा जा सकता है कि क्या मैं कोई राजा या विधि निर्माता हूँ जो मैं
राजनीति पर लिखता हूँ। मेरा उत्तर है कि मैं नहीं हूँ। अगर मैं वैसा होता, तो यह
कहने में समय नष्ट नहीं करता कि क्या किया जाना चाहिए, बल्कि उसे कर
डालता या ख़ामोश रहता।
मनुष्य जन्म से स्वतन्त्र होता है लेकिन हर जगह बेड़ियों में जकड़ दिया जाता
है।¹
गुलामी के जुवे को बलपूर्वक उतार फेंकना!
मैं कहना चाहूँगा कि जब तक लोग आज्ञापालन के लिए मजबूर किये जाते
रहें और वे आज्ञापालन करते रहें, अच्छा है; लेकिन वे जितनी जल्दी इस जुवे को
उतार फेंक सकें और उतार फेंकते हैं, तो वह और भी अच्छा है; कारण कि, यदि
लोग अपनी आज़ादी फिर उसी अधिकार (अर्थात ताक़त) से वापस लेते हैं जिस
अधिकार से यह उनसे छीनी गयी होती है, तो या तो उनका ऐसा करना न्यायसंगत
है, या उनसे इसे छीन लिये जाने का कोई औचित्य नहीं था।²
पृष्ठ 180 (115 )
ताक़त :
“सत्ता, जो हिंसा के द्वारा हासिल की जाती है, महज एक हड़पी गयी सत्ता
होती है, और सिर्फ़ तब तक ही बनी रहती है जब तक उसकी कमान सँभालने
वाले की ताक़त उसको मानने वालों की ताक़त पर हावी रहती है, और जब इसको
मानने वालों की ताक़त सबसे अधिक हो जाती है और वे उसके जुवे को उतार
फेंकते हैं, तो ऐसा वे उतने ही अधिकार और न्याय के साथ करते हैं जिसके साथ
उन पर सत्ता थोप रखी गयी थी। वही (ताक़त का) क़ानून जो सत्ता का अधिकार
देता है, बाद में उसे छीन भी लेता है; यह सबसे ताक़तवर का क़ानून है।”
दिदेरो – इंसाइक्लोपीडिया ³
“सत्ता”
- रूसो की प्रसिद्ध उक्ति, सोशल कॉन्ट्रैक्ट से
- वही
- देनी दिदेरो (1713-1784) : प्रबोधन काल का फ्रांसीसी दार्शनिक। विश्वकोष
(इन्साइक्लोपीडिया) का प्रमुख सम्पादक। फ्रांसीसी क्रान्ति की वैचारिक ज़मीन तैयार करने में
रूसो और वाल्तेयर के साथ उसकी मुख्य भूमिका थी।
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