भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 660, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 177 (112)
“जो आदमी ध्यान करता है वह दुराचारी प्राणी है।”¹
नागरिक क़ानून :
कमज़ोरों के उत्पीड़न और सबकी असुरक्षा की ओर इशारा कर धनिकों ने बड़ी
चालाकी से न्याय और शान्ति के नियम निरूपित किये, ताकि उनके द्वारा सबके
स्वामित्वों की गारण्टी रहे, और क़ानूनों को लागू करने के लिए एक सर्वोच्च शासक
की स्थापना की।
निश्चय ही समाज और क़ानूनों की उत्पत्ति इसी भाँति हुई होगी, जिसने ग़रीबों
को नयी बेड़ियाँ पहना दीं और धनिकों को नयी ताक़त प्रदान कर दी, प्राकृतिक
स्वतन्त्रता को अन्तिम रूप से ख़त्म कर दिया, और थोड़े से महत्त्वाकांक्षी लोगों के
लाभ के लिए, हमेशा-हमेशा के लिए सम्पत्ति और असमानता का क़ानून निर्धारित
कर दिया, एक चालाकी भरी लूट को एक अटल अधिकार में तब्दील कर
दिया, और इस प्रकार आइन्दा के लिए सारी मानवजाति को श्रम, दासता, और
दुर्गति का शिकार बना दिया।²
पुनश्चः असमानताएँ
लेकिन यह बात पूरी तरह प्राकृतिक क़ानून के ख़िलाफ़ है कि मुट्ठीभर लोग
तो बेशुमार दौलत गटकते रहें, जबकि विशाल भूखी आबादी जीवन की ज़रूरी
चीज़ों के लिए भी तरसती रहे।³
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उसकी रचनाओं का हश्र
एमिली और सोशल काण्ट्रैक्ट दोनों ही 1762 में प्रकाशित हुईं, पहली को
पेरिस में जलाया गया, रूसो बमुश्किल गिरफ़्तार होते-होते बचा, फिर दोनों किताबों
को सार्वजनिक तौर पर, जेनोआ में, उसकी जन्मस्थली में, जलाया गया, जहाँ उसे
कहीं अधिक शोहरत मिलने की उम्मीद थी।
- सम्भवतः रूसो का उद्धरण
- रूसो, सोशल कॉन्ट्रैक्ट
- वही
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