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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 659, कुल 788 में से

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पृष्ठ 659

पृष्ठ 176 (111)
विधायिका और कार्यपालिका
निजी हितों पर सामान्य हित की बलि रोकने के लिए, यह ज़रूरी है कि
विधायिका और कार्यपालिका की सत्ताएँ अलग-अलग हाथों में रहें, और
कार्यपालिका विधायिका के मातहत रहे।
जहाँ ये दोनों सत्ताएँ एक ही निरंकुश राजा में निहित होती हैं, वहाँ कोई नागरिक
सरकार नहीं होती, क्योंकि राजा और उसकी जनता के बीच कोई सर्वमान्य न्यायिक
सत्ता नहीं होती।
स्वतन्त्र समाजों में राज्यों के भिन्न-भिन्न रूप हैं, जनतन्त्र¹, अल्पतन्त्र, या
निर्वाचित राजतन्त्र तथा मिश्रित रूपों वाली व्यवस्थाएँ।
‘क्रान्ति का अधिकार’!
“जब सरकार समझौते के प्रति अपना दायित्व पूरा करने – यानी व्यक्तिगत
अधिकारों का संरक्षण करने – में विफल हो जाती है तो क्रान्ति न्यायसंगत बन जाती
है।
रूसो ¹
रूसो² :
समानता
कोई भी आदमी इतना अधिक धनी नहीं होना चाहिए कि वह दूसरे को ख़रीद
सके, और न ही कोई आदमी इतना अधिक ग़रीब होना चाहिए कि वह अपनेआप
को बेचने के लिए मजबूर हो जाये। भारी असमानताएँ निरंकुशता के लिए रास्ता
तैयार करती हैं।
सम्पत्ति और नागरिक समाज :
जिस पहले आदमी ने ज़मीन के एक टुकड़े को घेरकर यह कहने को सोचा
होगा कि ‘यह मेरा है’, तथा जिसे अपनी बात पर विश्वास करने वाले सीधे-सादे
लोग मिल गये होंगे, वही नागरिक समाज का असली संस्थापक था।
अगर किसी ने इस धोखेबाज़ी का पर्दाफ़ाश कर दिया होता, और यह एलान
कर दिया होता कि यह धरती किसी की सम्पत्ति नहीं है और कि इसके फल
सबके हैं, तब मानवजाति को इतने युद्ध, अपराध और सन्त्रास नहीं झेलने पड़े होते।

  1. और 2. मूल में ऐसे ही नोट किये हुए; देखें नोटबुक पृष्ठ सं. 118 (91) का
    सन्दर्भ 1
    शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 653