भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
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शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
DevanagariHindipublished788 पृष्ठ
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एक आदमी द्वारा दूसरे आदमी को पहुँचायी जा सकने वाली क्षतियों का
अनुभव ही नागरिक सरकार की प्रेरणा देता है, जो इस प्रकार गठित होती है :
- एक कामनवेल्थ गठित करने हेतु कुछ लोगों के बीच एक सर्वसम्मत आपसी
क़रार द्वारा, 2. बहुमत के इस प्रस्ताव द्वारा कि अमुक शासक को सत्ता पर आसीन
किया जाये, 3. सरकार और जनता के बीच इस क़रार द्वारा कि सरकार शासन करे
और जनता विधिसम्मत आदेशों का पालन करे।
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लॉक :
(नागरिक सरकार के दो सिद्धान्त-1690)
“किसी भी मनुष्य को शासन करने का प्राकृतिक अधिकार नहीं होता।”
वह प्राकृतिक अवस्था का — यानी शासनाधिकार और प्रभुत्व के मामले में
स्वतन्त्रता और समानता वाली एक ऐसी अवस्था का चित्रण करता है जो सिर्फ़
प्राकृतिक क़ानून या विवेक के ही अधीन रहे, जो लोगों को एक-दूसरे के जीवन,
स्वास्थ्य, आज़ादी और स्वामित्व अधिकारों के मामले में नुक़सान पहुँचाने से रोकते
हैं। निषेध या क्षतिपूर्ति के रूप में सज़ा देने का अधिकार प्रत्येक व्यक्ति के हाथ
में होता है।
प्राकृतिक अवस्था!
“प्राकृतिक अवस्था वास्तव में वह है जिसमें लोग आपस में फ़ैसला करने के
अधिकार के साथ, बिना किसी एक सर्वमान्य शासक के, विवेक के अनुसार एक
साथ रहते हैं।”
निजी सम्पत्ति!
“प्रत्येक व्यक्ति का यह प्राकृतिक अधिकार है कि वह अपने पास सम्पत्ति
रखे और प्राकृतिक सामग्री पर अपने निजी श्रम से प्राप्त उत्पाद पर भी अपना
अधिकार रखे। एक आदमी जितनी अधिक भूमि को जोत, बो, सुधार सकता है
और खेती-बाड़ी के काम में ला सकता है तथा उससे प्राप्त जितनी पैदावार
इस्तेमाल में ला सकता है, वह सब उसी की सम्पत्ति हैं।
सम्पत्ति और नागरिक समाज!
उसके अनुसार “सम्पत्ति” “नागरिक समाज” की पूर्ववर्ती है।
शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 651