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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 656, कुल 788 में से

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पृष्ठ 656

अन्तर नहीं है। सामान्य शान्ति और सुरक्षा की दिशा में इनकी उपलब्धियाँ इनके
द्वारा शासित जनता या लोगों की आज्ञाकारिता पर निर्भर करती हैं। फिर भी वह
‘राजशाही’ को ही अधिक पसन्द करता है। उसके विचार से ‘सीमित राजशाही’
ही सर्वोत्तम है। लेकिन वह इस बात पर भी ज़ोर देता है कि सम्प्रभु शासक को
निश्चय ही धार्मिक के साथ-साथ नागरिक मामलों का भी नियमन करना चाहिए,
और यह तजबीज भी करनी चाहिए कि कौन से सिद्धान्त शान्ति-व्यवस्था बनाये
रखने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
इस प्रकार, वह सम्प्रभुता के एक स्पष्ट और वैध सिद्धान्त की हिमायत तो
करता है, लेकिन इसके साथ ही वह राजा या सम्प्रभु शासक पैदा करने के लिए
सामाजिक समझौते की कल्पना को भी बरक़रार रखता है।
स्पिनोज़ा¹ : ( 1677 )
( मनुष्य की असमाजिकता )
अपनी कृति ट्रैक्टेटस पॉलिटिकस (1677), में वह मानता है कि शुरू-शुरू
में मनुष्यों का सभी चीज़ों पर समान अधिकार था, इसलिए प्राकृतिक अवस्था युद्ध
की अवस्था था। मनुष्यों ने अपने विवेक से प्रेरित होकर अपनी शक्तियों को
नागरिक सरकार की स्थापना के लिए संयुक्त किया। चूँकि मनुष्यों के पास निरंकुश
सत्ता थी, इसलिए इस प्रकार स्थापित सम्प्रभु सत्ता भी निरंकुश सत्ता ही थी। उसके
विचार से ‘अधिकार’ और ‘सत्ता’ एक समान है। अतः सत्ता से लैस होकर सम्प्रभु
शासक को सारे के सारे अधिकार स्वयमेव प्राप्त हो जाते हैं। इस प्रकार, वह
‘निरंकुशतावाद’ का समर्थन करता है।
पुफ़ेन्डोर² :
( लॉ ऑफ़ नेचर एण्ड नेशंस 1672)³
उसके विचार से, मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, जो परिवार और शान्तिमय
जीवन की ओर स्वाभाविक रुझान रखता है।

  1. स्पिनोज़ा (1632-1677) : देकार्त से प्रभावित डच दार्शनिक। उसने अपनी पुस्तक
    एथिक्स (1677) में यह विचार प्रकट किया कि मानव-जीवन ईश्वर (या प्रकृति) से
    ओतप्रोत है। अपारम्परिक विचारों के कारण अपने मूल सम्प्रदाय से 1956 में निष्कासित।
  2. सैमुअल बैरन फान पुफ़ेन्डोर (1632-1684) : जर्मन विधिवेत्ता और इतिहासकार।
    उसका विचार था कि राज्य के क़ानून प्राकृतिक क़ानून में ही शामिल हैं।
  3. सम्भवतः पुफ़ेन्डोर की पुस्तक, दि ज्यूरे नेचुरी एट जेण्टियम का अंग्रेज़ी शीर्षक
    650 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़